Home भोपाल मध्‍य प्रदेश में अधिकांश आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की जमीनों पर अतिक्रमण

मध्‍य प्रदेश में अधिकांश आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की जमीनों पर अतिक्रमण

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भोपाल। प्रदेश के अधिकांश आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इस समस्या से निपटने के लिए आयुष विभाग ने सभी जिलों से चिकित्सालयों में अतिक्रमण की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सालयों की जमीनों को मुक्त कराने का अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय स्तर पर शिकायतों की सुनवाई नहीं होने के बाद विभाग अतिक्रमण की जानकारी जुटा रहा है। इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाए जाएंगे।

राज्य सरकार अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रही है। आयुर्वेदिक जिला चिकित्सालयों की जमीनों पर अतिक्रमण की शिकायत लंबे समय से विभाग को मिल रही थी। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में स्थानीय स्तर पर नगर निगम या पालिका और जिला प्रशासन से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। आयुष संचालनालय के पास अतिक्रमण की जानकारी आने के बाद प्रदेश स्तरीय अभियान के तहत चिकित्सालयों की जमीन वापस लेने का आदेश जारी किया जाएगा।

इस तरह घेर ली गई अस्पतालों की जमीन

भोपाल में: आयुर्वेदिक चिकित्सालय भोपाल में परिसर की दीवारों एवं खिड़कियों से सटकर अतिक्रमण कर लिया गया है। अवैध कब्जों के कारण चिकित्सालय में हवा, रोशनी, मरीजों की निजता, सफाई आदि बाधित हो रही है। दायीं ओर सांची कॉर्नर एवं यूसुफ खान की झुग्गी, पीछे की ओर रोशनलाल जाटव एवं उनके परिवारों की झुग्गी बनी हुई हैं। इससे चिकित्सालय का दरवाजा नहीं खुल पाता। बायीं ओर हुबलाल वर्मा के गैरेज से दिक्कत है।

मुरैना में: आयुर्वेदिक चिकित्सालय मुरैना में मुख्य द्वार पर गुमटियों की भरमार है। चिकित्सालय आने-जाने का रास्ता बाधित हो गया है। अतिक्रमण करने वाले महिलाओं पर फब्तियां कसते हैं। इससे चिकित्सालय में आने वाले मरीजों की संख्या आधी रह गई है। महिलाएं अकेले चिकित्सालय आने से बचती हैं। स्थानीय निकाय को शिकायतें करने का असर नहीं हुआ। अधिकांश जिलों में इसी प्रकार की दिक्कत है।

बैतूल में: यहां आयुर्वेदिक अस्पताल के पास लंबे समय तक अतिक्रमण रहा। इससे अस्पताल में कई तरह की समस्याएं खड़ी होती थीं। बाद में अस्पताल की बाउंड्रीवॉल बनी तो अब इस समस्या से छुटकारा मिला है। शहडोल में भी बाउंड्रीवॉल होने से समस्या नहीं है।


इनका कहना
संचालनालय से सभी जिलों को पत्र भेजा गया है। चिकित्सालयों में अतिक्रमण की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी गई है। इसके आधार पर चिकित्सालयों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। इसमें स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। आवश्यकता हुई तो राज्य शासन से भी चर्चा की जाएगी।

  • करलिन खोंगवार देशमुख, प्रमुख सचिव सह आयुक्त, संचालनालय, आयुष

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