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होली पर इस बार महाराष्ट्र में डोली सरकार, बीते साल मप्र में आया था सियासी भूचाल, गिरी थी कांग्रेस सरकार

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  • सिंधिया व समर्थक विधायकों ने होली के दिन ही छोड़ी थी कांग्रेस
  • एंटीलिया केस ने अब महाराष्ट्र में मचाई हलचल,नित नए खुलासे
  • अमित शाह से मिले शरद पंवार, प्रफुल्ल पटेल

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

बीते साल दस मार्च को होली मनाई गई थी, हुरियारे सड़कों पर मस्ती में चूर थे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के चेहरों की रंगत उड़ी हुई थी। दरअसल, प्रदेश में बीते साल नित नए बदलते घटनाक्रमों के बीच इसी दिन कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दिया था और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात क ी थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को सिंधिया समर्थक रहे छह मंत्रियों के मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश राज्यपाल से करनी पड़ी। अगले दिन सिंधिया व उनके समर्थकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। दस दिन बाद यानी बीस मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा और 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार का 15 महीने में ही पतन हुआ।

इस बार होली के ऐन मौके पर कुछ ऐसे ही हालात पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में हैं। शनिवार-रविवार की रात देश के गृहमंत्री अमित शाह अहमदाबाद में थे और महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के मुखिया शरद पंवार ने श्री शाह से मुलाकात की। उनके साथ गुजरात मूल के व एनसीपी के एक अन्य कद्दावर नेता प्रफुल्ल पटेल भी थे। आधी रात के बाद हुई इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार की नींद उड़ा दी है। गृहमंत्री अमित शाह के जवाब ने मुलाकात के रहस्य को और गहरा दिया है। रविवार को मीडिया से चर्चा के दौरान पंवार से मुलाकात के सवाल को वह यह कहकर टाल गए कि हर बात सार्वजनिक नहीं की जाती। बहरहाल, शाह की पवार से मुलाकात को महाराष्ट्र में सरकार चला रही महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है।

शिवसेना ने देशमुख को बताया एक्सीडेंटल मिनिस्टर

इधर, शिवसेना ने भी रविवार को अपने अखबार सामना के जरिए महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर निशाना साधा। संजय राउत ने सामना में लिखे लेख में पूछा कि आखिर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे की वसूली की जानकारी गृह मंत्री देशमुख को कैसे नहीं हुई?असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी सचिन वझे को इतने अधिकार किसने दिए? यही जांच का विषय है।

मिठी नदी में मिले डीवीआर, बढ़ी वझे की मुश्किलें

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर से बरामद विस्फ ोटकों से भरी स्कॉर्पियो के कथित मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) रविवार को मामले में मुख्य आरोपी मुंबई पुलिस के निलंबित असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर ले गई। वझे की निशानदेही पर पुलिस ने 12 गोताखोरों को नदी में उतारा तो उनके हाथ दो कंप्यूटर सीपीयू, वाहनों की दो नंबर प्लेट, एक लैपटॉप और अन्य सामान लगा।

दरअसल, वझे ने पूछताछ में यह स्वीकार किया कि उसने मामले से जुड़े अहम साक्ष्य मिठी नदी में फेंक दिए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये सारी चीजें एंटीलिया और मनसुख हिरेन केस से जुड़ी हैं। बताया जाता है कि नदी से मिली वाहनों की नंबर प्लेट एंटीलिया और मनसुख केस में उपयोग में लाई गई किसी कार की हो सकती हैं। बता दें कि एनआईए ने अब तक वझे से पांच कारें बरामद की हैं। एंटीलिया के पास खड़ी स्कॉर्पियो से भी कुछ नंबर प्लेट मिले थे। इनमें से कई नंबर मुकेश अंबानी की सुरक्षा में तैनात सरुक्षाकर्मियों के वाहनों से मिलती-जुलती पाई गई थीं।

निरुपम ने कसा तंज

मीठी नदी से उक्त साक्ष्य मिलने पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट कर तंज कसा कि एंटीलिया कांड में मिले ये सबूत कौन लोग मिटाना चाहते थे। उनके नाम उजागर होना चाहिए। बेहतर होगा सत्यता सभी के सामने आए। उन्होंने आगे कहा कि मिठी नदी पहले से ही प्रदूषित है, उसे और प्रदूषित क्यों कर रहे हैं।

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