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दमोह विधानसभा उपचुनाव: पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ ने कहा, पिता का आदेश इसलिए नहीं लड़ूंगा उपचुनाव

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दमोह। विधानसभा उपचुनाव में अभी तक तीसरे प्रबल प्रत्याशी की भूमिका अदा करते आ रहे प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया ने गुरूवार को अपने पत्ते खोल दिए। उन्होंने साफ कर दिया कि अब वह चुनाव नहीं लड़ेंगे और भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव लड़ना था, लेकिन उनके पिता और शीर्ष नेतृत्व का आदेश है, इसलिए वह अपनी उम्मीदवारी समाप्त करते हैं।

प्रेस को संबोधित करते हुए सिद्धार्थ ने कहा कि चुनाव में जो उनकी उम्मीदवारी थी, उसे वह समाप्त करते हैं और प्रेस के माध्यम से यह संदेश दमोह की जनता को देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता का निर्देश और शीघ्र नेतृत्व का जो आदेश है, वह उसका पालन करेंगे और पार्टी के साथ पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि बहुत लंबे समय से इस बारे में बात हो रही थी कि वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं।

उन्होंने कहा कि चुनाव तो लड़ना था, लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है, इसलिए अब वह पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करेंगें। किसी दबाब से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई दबाब नहीं है, केवल पिता का आदेश है, जिसका पालन कर रहा हूं।

पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करने के समन्वय पर उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के साथ काम करूंगा तो पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ करूंगा। अपने समर्थकों को प्रेरित करूंगा कि वह भी निष्ठा से काम करें। यदि उन्हें पार्टी जवाबादारी देती है तो वह उसे निभाएंगे वरना वह अपने वार्ड में काम करेंगे। वह अपने वार्ड से आठ पंचवर्षीय से करीब एक हजार वोटों से जीतते हैं, वही रिकार्ड वह इस बार भी कायम रखेंगे।

कैबिनेट का दर्जा और निगम अध्यक्ष के पद मिलने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह काल्पनिक प्रश्नों का जबाब नहीं देते हैं, लेकिन इस प्रश्न का जबाब देना जरूरी है, इसलिए वह बताना चाहते हैं कि वह या उनका परिवार विश्वासहीन नहीं है। कैबिनेट का दर्जा या निगम अध्यक्ष का पद लेकर पार्टी के प्रति विश्वासहीन नहीं हो सकते। वह पार्टी के साधाराण कार्यकर्ता हैं और केवल यही चाहते हैं कि पार्टी का उनपर विश्वास बना रहे, यही उनके लिए काफी। चुनाव लड़ने का फैसला करने में इतना समय लगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ना चाहते थे, एक यात्रा शुरू की थी, उसपर एक अल्प विराम लगाया है। यात्रा चालू रहेगी, मंजिल अभी बाकी है।

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