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कोरोना ने छीना काम तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सब्जी बेचने का स्टार्टअप शुरू किया, अब 10 लाख रुपए का टर्नओवर, दूसरों को भी काम दे रहे

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कोरोना महामारी की वजह से कई लोगों के रोजगार चले गए। ऐसे में कुछ लोग उदास और हताश होकर घर बैठ गए, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने न केवल नए रास्ते खोजे, बल्कि आज दूसरों के लिए वे मिसाल बन गए हैं। किसी ने कील का व्यवसाय शुरू किया तो कोई गुड़ पाउडर बेचने लगे। एक इंजीनियर ने तो सब्जी का काराेबार शुरू कर दिया।

सब्जी गाड़ी पर भीड़ देखी तो आया बिजनेस का विचार
कटारा हिल्स के 38 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सावन चौरे कोरोना आने के पहले तक कई कंपनियों के साथ काम करते थे। मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने से काम बंद हो गया। वे घर खाली बैठे थे कि एक दिन नगर निगम की गाड़ी सब्जी बेचने आई। यहां भीड़ थी। यहीं से उन्हें सब्जी बेचने का आइडिया आया। उन्होंने दोस्तों की मदद से टेली नीड्स नाम से एक वेबसाइट और एप बनाया।

इसमें सब्जी बेचने वाले किसान और खरीदारों को जोड़ा। जब बहुत ज्यादा लोग इससे नहीं जुड़े तो खुद ही सब्जी खरीदने के लिए मंडी पहुंच गए। सब्जी खरीदने और एप या सीधे मिल रह ऑर्डर से सब्जी पहुंचाते। एक ही महीने में अच्छा रिस्पॉन्स मिला। सब्जी के साथ ग्रोसरी भी रखी। दूसरी लहर में दूध, दही भी होम डिलेवर करने लगे। अभी 10 लाख रु. महीने का टर्नओवर हो गया है।

6 महीने में एक करोड़ के टर्नओवर पर पहुंचे
भोपाल के 35 वर्षीय साेहित विश्वकर्मा ने नवंबर 2020 में कील बनाने की कंपनी शुरू कर की। वो भी उस समय जब चारों तरफ व्यापार कमजोर पड़ा था। सोहित ने बताया कि वे तीन साल से टाइल्स का काम करते थे, लेकिन कोरोना ने उस व्यापार को मंदा कर दिया। वे समझ नहीं पा रह थे कि क्या करें? ऐसे में उनकी मुलाकात खादी ग्रामोद्योग विकास योजना के नोडल अधिकारी संजीव राणा से हुई

उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। तब मार्केट में डिमांड को लेकर सर्चिंग शुरू की तो पता चला कि भोपाल में कीलों की मारामारी है। 80 फीसदी माल इंदौर से आता है। कुछ अपने पास की जमा पूंजी ली और बाकी लोन लिया। महज छह महीने में एक करोड़ रुपए से ऊपर का टर्नओवर निकल गया। इनके यहां 8 लोगों को रोजगार भी मिला और यह सभी वे हैं, जिनके कोरोना ने रोजगार छीन लिए।

गुड़ के धंधे में 10 से 12 लाख कमा रहे
55 वर्षीय राकेश उदेनिया ने काेरोना महामारी शुरू होने के छह महीने बाद अपने काम को बदला। मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के नारगी गांव के रहने वाले राकेश 6 महीने से भोपाल में सक्रिय हैं। दरअसल वे भोपाल हाट में लगे मेले में आए थे और यहीं उन्हें एक अधिकारी की मदद से शुद्ध घी मिला हुआ गुड़ पाउडर बनाने की प्रेरणा मिली।

फिर इसी काम को शुरू कर दिया। इससे चॉकलेट बनती है, जिसे बहुत हेल्दी माना जाता है। इस समय जमकर डिमांड में है। राकेश बताते हैं कि वे तो अपने पुराने काम से उम्मीद खो बैठे थे, लेकिन गुड़ के व्यवसाय ने उन्हें ऑक्सीजन दी। अब हर महीने 10 से 12 लाख का टर्नओवर है। दर्जन भर लोग उनके साथ जुड़कर काम भी कर रहे हैं। राकेश बताते हैं कि इस कोरोना ने नया सोचना सिखा दिया।

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