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सहकारी समितियां: वादा पूरा करने की तैयारी में सरकार, 27 हजार कर्मचारियों को नियमित वेतन के साथ कमीशन व भत्ता भी मिलेगा

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  • सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया की पहल

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

गत फरवरी में विधानसभा सत्र शुरू होने से पूर्व प्रदेश की साढ़े चार हजार से ज्यादा सहकारी समितियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर थे और गरीबों को राशन वितरण की व्यवस्था ठप हो गई थी। तब सहकारिता मंत्री डॉ.अरविंद भदौरिया ने पहल कर हड़ताली कर्मचारियों से बात की और उनकी मांगें पूरी करने का वादा करते हुए एक समिति गठित की थी। डॉ.भदौरिया की पहल रंग लाई। इन समितियों के करीब 27 हजार कर्मचारियों को न केवल नियमित वेतन बल्कि भत्ते व अल्पावधि ऋण एवं उपार्जन का कमीशन भी मिलेगा।

दरअसल, सहाकारिता आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और राज्य सरकार शीघ्र ही समिति की सिफारिशों को लागू कर सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार,समिति ने सहकारी समितियों द्वारा किसानों को दिए जाने वाले अल्पावधि वाले ऋण पर डेढ़ प्रतिशत कमीशन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही खरीफ एवं रबी फसलों की सरकारी खरीद पर सहकारी समितियों की सहभागिता पर उन्हें तय कमीशन भी नियमित दिया जाएगा।

बकाया है 560 करोड़ रुपये की देनदारी

दरअसल, समितियों के लिए कमीशन की उक्त व्यवस्था से ही इनके अधिकारी,कर्मचारियों के वेतन,भत्ते का वितरण होता है। यह कमीशन किसानों को खाद-बीज,सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण एवं रबी-खरीफ फसल उपार्जन से समितियों को हासिल होता है। बताया जाता है कि कुछ सालों तक यह व्यवस्था सुचारू चली,लेकिन उपार्जन व पीडीएस में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम की दखलंदाजी एवं भुगतान में विलंब करने की प्रवृत्ति से गड़बड़ शुरू हुई। बताया जाता है कि निगम पर समितियों की करीब 560 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है। लंबे समय से यह भुगतान नहीं मिलने से समितियों के अधिकारी,कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते वे आंदोलन पर उतरे थे।

सहकारी बैंक की भी मनमानी

सहकारी समितियों के प्रति सहकारी बैंकों का रवैया भी उदासीनतापूर्ण रहा। दरअसल,कृषि ऋण पर समितियों को जिला सहकारी बैंकों से पौने दो प्रतिशत कमीशन दिए जाने का प्रावधान है। समितियां ऋण देने से लेकर इसकी वसूली करने का भी कार्य करती हैं,लेकिन पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदा से वसूली एवं शून्य प्रतिशत ब्याज दर व्यवस्था अंतर्गत राज्य सरकार की ओर से ब्याज के भुगतान में विलंब के चलते समितियों का उक्त कमीशन मिलना भी बंद हो गया। इससे भत्ते तो दूर कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना भी दूभर हुआ।

आगे क्या

  • समिति ने अपनी रिपोर्ट में लंबित भुगतान यथाशीघ्र किए जाने के साथ ही उक्त सभी प्रकार के कमीशन
    व ऋण पर न्यूनतम डेढ़ प्रतिशत तक दिए जाने की व्यवस्था नियमित करने की सिफारिश की है।
  • समिति शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेंगी। माना जा रहा है कि इन सिफारिशों को अगले माह से लागू किया जा सकता है।

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