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लोकसभा चुनाव में कालेधन उपयोग का मामला: मुख्य सचिव आज चुनाव आयोग को सौंपेंगे स्टेटस रिपोर्ट

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  • 3 आईपीएस समेत चार अफसरों के खिलाफ हो चुकी है एफआईआ

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

लोकसभा चुनाव में कालेधन उपयोग मामले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की रिपोर्ट पर मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की? इसको लेकर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस और अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा चुनाव आयोग को 1 अप्रैल को स्टेटस रिपोर्ट से अवगत कराएंगे। इससे पहले राज्य शासन ने मामले में आरोपी तीनों आईपीएस अफ सरों और एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी को चार्जशीट देकर 15 दिन में जवाब मांगा था। इसके साथ ही ईओडब्ल्यु में एफ आईआर दर्ज कराई थी।

मंत्रालय सूत्रों ने बताया, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को तीनों आईपीएस सुशोभन बनर्जी, वी. मधुकुमार व संजय माने के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी थी। इसके बाद गृह विभाग ने तीनों आईपीएस अफ सरों और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा को चार्जशीट की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा था, लेकिन इसमें करीब एक माह का विलंब हो गया। ऐसे में गृह विभाग ने फ रवरी माह में चारों अफ सरों को चार्जशीट जारी की।

सूत्रों के मुताबिक, चारों अफ सरों ने जवाब देने से पहले सीबीडीटी की रिपोर्ट की कॉपी मांग ली है। हालांकि राज्य शासन की तरफ से उन्हें रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी गई है। इस बीच, चुनाव आयोग ने राज्य शासन से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांग ली है। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव गृह गुरुवार 1 अप्रैल को दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग के उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार को रिपोर्ट सौंपेंगे।

ज्ञात हो कि मप्र में लोकसभा चुनाव-2019 से पहले आयकर छापों के बाद कालेधन के लेन-देन मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग ने 16 दिसंबर 2020 को मुख्य सचिव को भेजे पत्र में साफ कर दिया था कि केंद्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड की जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसी संबंध में बात होगी। मप्र को बताना होगा कि वह आगे क्या कार्रवाई करेगा? इसके बाद उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने मप्र सरकार के मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को 5 जनवरी को दिल्ली तलब किया था।

एक माह बाद भी शुरू नहीं हुई विभागीय जांच

मंत्रालय सूत्रों ने बताया, मामले में केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को तीनों आईपीएस अफ सरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुमति राज्य सरकार को दे दी थी, लेकिन हालत यह है कि एक माह बाद भी इन अफ सरों की विभागीय जांच शुरू नहीं हो पाई है। इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार से सीबीडीटी की रिपोर्ट पर एक्शन लेने के निर्देश दिए थे। इस पर सरकार ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को एफ आईआर दर्ज करने को कहा था। ईओडब्ल्यू ने 2 जनवरी को इसकी प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।

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