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मानव संग्रहालय में माह का ‘प्रादर्श: ओडिशा की ‘गजमुख मुखौटा से परिचित हो रह कलाप्रेमी

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भोपाल। देश का तटीय राज्य ओडिशा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। रचनात्मकता इस राज्य की खूबियों में से एक है। यहां की हस्तकला दुनिया भर में मशहूर है। खासकर इस सूबे की मुखौटा कला को खूब पसंद किया जाता है।

ओडिशा की इसी कला में से मशहूर कला ‘गजमुख को इस माह मानव संग्रहालय के अंतरंग भवन वीथि संकुल में देखा जा सकता है। संग्रहालय की श्रंखला ‘माह के प्रादर्श के तहत इसे संजोया गया है। प्रदर्शनी का शुभारंभ ख्यात कोरियोग्राफर चंद्र माधव बारिक ने किया।

इस प्रादर्श का संकलन एवं संयोजन डॉ सुदीपा रॉय (सहायक कीपर) द्वारा किया गया है। प्रादर्श के बारे मे संयोजक डॉ. सुदीपा रॉय ने बताया कि शुभ के देवता भगवान गणेश की मूर्तियों या उनके प्रतीक का घर में होना हिंदुओं में अच्छा माना जाता है। यहां प्रदर्शित मुखौटा भगवान गणेश का प्रतिनिधित्व करता है। गजमुख भगवान गणेश के 21 नामों में से एक है। गजमुख दो शब्दों गज और मुख से मिलकर बना है, जिसमें गज का अर्थ हाथी और मुख का अर्थ चेहरा है। उडिय़ा स्थानीय बोली में भी मुखौटे के लिए ‘मुखाÓ शब्द का उपयोग किया जाता है।


ओडिशा में लकड़ी, सोलापिथ, पेपर मेशी, गोबर आदि विभिन्न माध्यमों में तैयार किए गए मुखौटों की एक विस्तृत श्रृंखला है। वजन में हल्की होने और आसान उपलब्धता के कारण ओडिशा के कलाकारों में कागज या कागज की लुगदी को मुखौटे, खिलौने और विभिन्न सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। इन कला वस्तुओं में व्यक्त लोक कलाकारों की तकनीकी विशेषज्ञता और सौंदर्य बोध अद्भुत है। यद्यपि मुखौटे का उपयोग विभिन्न प्रयोजनों जैसे सजावट, नृत्य, धार्मिक जुलूस आदि के लिए किया जाता है तथापि इस प्रकार के विशाल मुखौटे मुख्यत: सजावटी उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाते हैं। रघुराजपुर के कलाकारों का रचनात्मक कौशल विभिन्न प्रकार के पट्टचित्रों, नारियल के खोल, लैंप शेड, लकड़ी के खिलौनों एवं अन्य शिल्प वस्तुओं में दिखाई देता है। ये कलाकार रामायण, महाभारत एवं भगवान जगन्नाथ के प्रसंगों से संबंधित चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।

इस तरह तैयार होती हैं कलाकृति

एक पेपर मेशी वस्तु की सुंदरता इसके सुंदर रंगों में निहित होती है। ओडिशा के पेपर मेशी कलाकार चमकीले रंगों को पसंद करते हैं जो वस्तु की सुंदरता को ब?ाते हैं। काले या किसी गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर विभिन्न रंगों का प्रयोग किया जाता हैं। रंगों को खनिजों और वनस्पतियों जैसे प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त किया जाता है और उनकी दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए वानस्पतिक गोंद भी उपयोग की जाती है। हालांकि मुखौटे सहित पेपर मेशी की अन्य वस्तुओं को तैयार करने में ज्यादातर हाथ से ही कार्य किया जाता है तथापि बारीक छेनी, तेज चाकू आदि औजारों का भी उपयोग किया जाता है।

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