Home भोपाल फकीरी में अमीरी का जीवन जीते रहे ‘अमीरचंद’

फकीरी में अमीरी का जीवन जीते रहे ‘अमीरचंद’

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-याद किए गए संस्कार भारती के दिवंगत राष्ट्रीय महामंत्री
-संस्कार भारती भोपाल ईकाई ने आयोजित की श्रद्धांजलि सभा

भोपाल। अमीरचंद जी का नाम उनके माता-पिता ने किस संदर्भ में रखा, लेकिन उन्होंने फकीरी का रास्ता चुना। इसलिए यदि उन्हें फकीरी का अमीर कहा जाये तो अतियोक्ति नहीं होगी। वे एक सहज और सरल व्यक्ति थे। कलाकारों को संगठित करने का काम कठिन है लेकिन उन्होंने इस कठिन कार्य को भी कर दिखाया था। वे अंतिम सांस तक राष्ट्र और कला के प्रति समर्पित रहे।


इस तरह के विचार आज मानस भवन के सभागार में सुनाई दिए। मौका था संस्कार भारती के दिवंगत राष्ट्रीय महामंत्री अमीर चंद जी को श्रद्धांजलि देने बुलाई श्रद्धांजलि सभा का। सभा का आयोजन संस्कार भारती भोपाल की ओर से आयोजित किया गया था। ्र्र्रसभा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र सह कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध तथा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

बॉक्स-निजी आकांक्षाओं से दूर रहे

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र सहकार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने उनका स्मरण करते हुए कहा कि संस्कार भारती का कार्य संवेदनशील है क्योंकि यह कला के लिए कार्य करती है। कलाकारों को एकत्र करना और उन्हें समकालीनता से जोड़े रखने का कार्य बाबा योगेन्द्र ने किया था। अमीरचंद जी भी उसी परंपरा के थे। नाम अमीरचंद होने के बाद भी फकीरी का जीवन बिताया। वे आत्मप्रदर्शन, आकांक्षा और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से दूर रहे। उनके इसी गुण को अपने जीवन में हम उतारें तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सभा मेें उपस्थित सांसद साध्वी प्रज्ञा ने अपने उद्बोधन में अमीरचंद जी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका और मेरा साथ बहुत कम रहा लेकिन जितना भी रहा उसमें यह जरूर जान लिया कि वे तपस्वी व्यक्ति थे। इस बात का प्रमाण उनकी मृत्यु खुद देती है। इस लोक से उस लोक तक की उनकी यात्रा जिस तरह से बिना कष्ट के रही है वह किसी तपस्वी की हो सकती है। राष्ट्र के प्रति जीवन अर्पित करने वाली पुण्यात्मा थी।

बॉक्स-संस्था के प्रति हमेशा चिंतित रहे

संस्कार भारती भोपाल की अध्यक्ष अरुणा शर्मा ने उन्हें सादा,सरल और मधुर स्वभाव का व्यक्ति बताया। उन्होंने अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्था के कार्यों को लेकर हमेशा बैठकों में मिलना होता था। वे हमेशा संस्था के प्रति चिंतित रहते थे। वे आखिरी सांस तक लोगों को संस्कारित करने के कार्य में लगे रहे। यह सभा उनके इसी समर्पण भाव के प्रति कृतज्ञता का भाव लिये हुए है।

पूर्व विधायक शैलेन्द्र प्रधान ने भी उनके साथ गुजारे क्षणों को याद करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व बड़ा ही ओजस्वी था। वे बहुत दूरगामी सोच रखते थे। ाश्री प्रधान ने कहा कि उन्हें पूर्वोत्तर के राज्यों में कलाकारों को जोडऩे का काम दिया गया था। अपनी कार्यकुशलता के दम पर उनकी स्थानीय भाषा में ही एक वृहद आयोजन कर दिखाया था। उनका जाना संगठन की एक बड़ी और मेरी निजी क्षति है।

पूर्व विधायक सुहास प्रधान ने अपने आत्मीय रिश्तों को केन्द्र में रखकर कहा कि उनके मेरे बीच देवर-भाभी या भाई-बहन का सा रिश्ता था। वे हमेशा अपने कार्य के प्रति समर्पित दिखाई देते थे। यात्रा के दौरान हमेशा मुझसे भोजन सामग्री की मांग करते थे। वे खाने के बड़े शौकीन थे मन से निश्च्छल और सभी के प्रति पे्रम रखने वाले थे। इसके पूर्व बोधमिता ने स्व. अमीरचंद जी का परिचय दिया। सुप्रसिद्ध चित्रकार रेखा भटनागर के शिष्य निमिष द्वारा बनाया पोर्टेट सांसद साध्वी प्रज्ञा को प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन दुर्गा मिश्रा और बोधमिता ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर भोपाल ईकाई के कार्यकारी अध्यक्ष राकेश सेन,साहित्यकार कुमकुम गुप्ता,संजय मेहता, सरफराज,पंजाबी अकादमी की निदेशक नीरू सिंह, नीरव प्रधान,सुश्रुत गुप्ता,ब्रजराजेश्वर शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित थे। स्मरण रहे कि अमीरचंद जी का निधन गत् 16 अक्टूबर को अरुणाचल से लौटते समय हो गया था। उनका अंतिम संस्कार ग्वालियर में किया गया था।

उनके अधूरे कार्य पूरे करने होंगे

संस्कार भारती के पूर्व प्रांतीय मंत्री सुरेश राठौर ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि भोपाल में दिव्यांग कला साधक संगम हो। श्री राठौर ने सभी से आग्रह किया कि यदि हम यह कार्य कर सके तो उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कलाकार विजय सप्रे ने कहा कि कलाकारों को संगठित करने का दुष्कर कार्य उन्होंने किया। अब उनके अधूरे कार्यों को पूरा करना हमारा दायित्व है।

बॉक्स-इसे चैतन्य सभा कहें

सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम रखने वाला व्यक्ति पुण्यात्मा होता है। ऐसे व्यक्ति की मृत्यु नहीं गति होती है। इसलिए इसे श्रद्धांजलि सभा न कहकर चैतन्य सभा कहना चाहिए। ऐसे व्यक्ति की स्मृति हमें दु:खी नहीं चेताती है। इस पर संचालन कर रही दुर्गा मिश्रा ने संस्था की तरफ से घोषणा की कि अब ऐसे आयोजनों को चैतन्य सभा नाम दिया जाएगा।

भक्ति गीतों ने संजीदा किया

अवसर के अनुरूप सभा में शोक की छाया थी। ऐसे में भक्ति संगीत शांति देता है। कार्यक्रम में अजय विश्वरूप के भक्ति गीतों के बीच उपस्थितों ने पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही सुरेखा कामले और उमा सक्सेना ने भी भक्ति रचनाओं से सभी के मन को धीरज दिलाया।

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