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कोरोना के कारण डिप्रेशन में जा रहे एम्स डॉक्टर, साप्ताहिक क्वारेंटाइन सुविधा मांगी

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  • रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पत्र लिखकर एम्स प्रबंधन से की मांग, डॉक्टरों के हितों का रखें ख्याल

भोपाल। कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। एम्स भोपाल में मरीजों के इलाज में दिन लगे डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स अवसाद के शिकार हो रहे हैं। लगातार बिना छुट्टी ड्यूटी इसकी बड़ी वजह है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने एम्स प्रबंधन को पत्र लिखकर कोविड ड्यूटी स्टाफ बढ़़ाने की मांग की है। यही नहीं रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि सात दिन तक कोविड ड्यूटी के बाद एक हफ्ते की क्वारेंटाइन सुविधा दी जानी चाहिए।

एम्स के फैसले से डॉक्टर नाराज

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ श्रवण जेएस द्वारा एम्स कोविड नोडल ऑफीसर को भेजे गए पत्र के मुताबिक 7 सूत्रीय मांगों पर जल्द अमल में लाने की मांग की गई है। डॉ. श्रवण ने बताया कि इस वक्त आम मरीजों की तुलना में कोविड से ज्यादा मौतें हो रहीं हैं। लाख प्रयास के बावजूद आम मरीजों की तुलना में ज्यादा मौतें होने और स्थिति भयावह होने से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ डिप्रेशन का शिकार हो रहा है।

यही नहीं एम्स प्रबंधन के अनुसार ड्यूटी करते वक्त भी यदि कोई डॉक्टर या स्टाफ संक्रमित होता है तो उसे पेड मेडिकल लीव(सवैतनिक अवकाश सुविधा) नहीं मिलेगी। बल्कि संक्रमित डॉक्टर को अपने अवकाश में से ही कटौती करानी होगी। यदि कर्मचारी के अवकाश नहीं बचे हैं तो उसे नो वर्क नो पे यानि अवैतनिक छुट्टी संक्रमित रहने के दौरान लेनी होगी। इस आदेश में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। मालूम हो कि एम्स में बीते कुछ महीनों पहले हुई टास्क फोर्स कमेटी की बैठक में क्वारेंटाइन सुविधा के निर्णय को समाप्त कर दिया गया था।

अस्पताल में आरक्षित हों स्टाफ के लिए 10 फीसदी बिस्तर

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. देवेश दुबे ने बताया कि इस वक्त हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में मरीजों को बिस्तर नहीं मिल पा रहे हैं। यहां तक कि मरीजों का इलाज करते वक्त संक्रमित हुए डॉक्टर्स व कर्मचारियों को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में एम्स के कर्मचारियों व उनके परिवार के संक्रमित सदस्यों के लिए 10 फीसदी बिस्तर आरक्षित किए जाने चाहिए।

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