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मिलावटी शराब के बाद अब रेत के अवैध कारोबार पर भी अंकुश लगाने की तैयारी

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  • निजी एजेंसी सर्वेक्षण कर बनाएगी खनन की योजना
  • केंद्रीय मंत्रालय की शर्तों पर ही होंगे नए ठेके

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल।

मिलावटी शराब को लेकर कड़े कानून के बाद प्रदेश में अब रेत के अवैध खनन पर अंकुश लगाने की भी तैयारी है। हालांकि यह काम केंद्र सरकार करने जा रही है और उसकी योजना का असर दो साल बाद होने वाले नए ठेकों पर दिखेगा।

दरअसल, मप्र समेत कुछ अन्य राज्यों में रेत के अवैध खनन के कारोबार को बढ़ते देख केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस पर अंकुश लगाने आगे आया है। राज्यों के वन क्षेत्रों की खदानों की तरह अब जल स्त्रोतों से रेत खनन को लेकर भी केंद्रीय मंत्रालय की अनुमति जरूरी होगी। यही नहीं यही मंत्रालय तय करेगा कि कौन सी जलीय संरचना से कितनी रेत और कहां से निकाली जा सकेगी।

इसके लिए मंत्रालय एक निजी एजेंसी के माध्यम से मप्र समेत विभिन्न राज्यों में सर्वेक्षण कराएगा। सर्वेक्षण में उन राज्यों को प्राथमिकता रहेगी जहां अवैध रेत खनन के मामले सर्वाधिक है। मप्र इस मामले में बदनाम है। विशेषकर ग्वालियर,चंबल संभाग में माफिया हावी है और अवैध खनन को लेकर वहां कई अपराधिक वारदातें सामने आ चुकी हैं।

प्रदेश के 40 जिले होंगे सर्वेक्षण के दायरे में

मप्र में छोटी,बड़ी करीब 107 नदियां हैं। इनमें 40 जिले ऐसे हैं जहां रेत खनन व इसका भंडारण होता है। इनमें नर्मदा घाटी क्षेत्र के जिले प्रमुख हैं। इनके अलावा ग्वालियर, चंबल क्षेत्र में मुरैना,भिंड श्योपुर व शिवपुरी में अवैध खनन की शिकायतें सर्वाधिक हैं। वहीं बुंदेलखंड व बघेलखंड में केन, बेतवा, मंदाकिनी नदी में अवैध खनन होता रहा है।

उक्त सर्वेक्षण के दायरे में उक्त सभी जिले शामिल किए जाएंगे। प्रदेश में रेत के बेजा खनन से नर्मदा, चंबल सहित अनेक प्रमुख नदियों में जलीय जीवों, पर्यावरण और जैव विविधता पर तो प्रतिकूल असर पड़ ही रहा है, नदियों का भौगोलिक स्वरूप भी बदल रहा है। जो पर्यावरण की दृष्टि से नुकसानदायक है।

जिलो से छिनेगा खनन योजना बनाने का काम

विभागीय सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अपनी योजना से राज्य के खनिज विभाग को अवगत करा दिया है। इसके मुताबिक,अब केंद्रीय मंत्रालय ही प्रदेश में रेत खनन की जिलेवार योजना तैयार करेगा। सर्वेक्षण रेत उत्खनन से नदियों,पर्यावरण,जैव विविधता एवं जलीय जीवों पर पडऩे वाले असर का आंकलन कर किया जाएगा। इसी आधार पर संबंधित सर्वेक्षण एजेंसी पांच साल की रेत उत्खनन योजना बनाएगी और फि र राज्य सरकार उस योजना और शर्तों के मुताबिक ही रेत खदानें नीलाम कर सकेगी। वर्तमान में जिलों के खनिज अधिकारी ही रेत खनन की पंचवर्षीय योजना तैयार करते हैं और संबंधित कलेक्टर के अनुमोदन पर खदानों की नीलामी की जाती है।

नहीं प्रभावित होंगे मौजूदा ठेके

बताया जाता है कि सर्वेक्षण करने वाली एजेंसी के नाम का खुलासा अब तक नहीं किया गया है। अलबत्ता माना जा रहा है कि यह कार्य आगामी एक-दो साल में पूरा कर योजना को लागू किया जाएगा। ऐसे में प्रदेश में रेत खनन के नए ठेके नए नियमों के तहत होंगे,लेकिन वर्ष 2022-23 तक के लिए नीलाम किए गए वर्तमान ठेके इससे अप्रभावित रहेंगे।

केंद्रीय निजी एजेंसी ही करेगी निगरानी

केंद्र की इस योजना के तहत सर्वेक्षण एवं रेत खनन के नए मापदंड तय करने वाली एजेंसी ही अपनी अनुशंसाओं के पालन की निगरानी भी करेगी। नए मापदंडों में संबंधित स्थल से रेत खनन की मात्रा भी तय होगी। सर्वेक्षण से छूटी जल संरचनाओं से इनके लिए मापदंड तय होने तक खनन नहीं किया जा सकेगा। यही नहीं उक्त एजेंसी निजी भूमि पर जमा होने वाली रेत की नीलामी को लेकर भी नियम तय करेगी।

गौरतलब है कि इससे पूर्व मिलावटी शराब से पिछले 15 माह में 53 लोगों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने इस कारोबार पर अंकुश लगाने कड़े कदम उठाए हैं। इसी तरह,मनरेगा योजना में मजदूरों व निर्माण के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने भी दो नए एप लांच किए गए हैं। इनकी मदद से अब न केवल हितग्राही श्रमिकों की भौतिक हाजिरी होगी बल्कि निगरानीकर्ता को भी सप्ताह में कम से कम एक दिन मौके पर पहुंचकर जांच करना व इसकी जानकारी एप के माध्यम से सार्वजनिक करनी होगी।

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