Home भोपाल ’ट्रकों पर कोरोना शायरी’ लिखवाकर प्रशासन ने की ‘संयुक्त अनूठी पहल’

’ट्रकों पर कोरोना शायरी’ लिखवाकर प्रशासन ने की ‘संयुक्त अनूठी पहल’

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  • कोरोना टीकाकरण जागरूकता का संदेश देंगी शायरी, सर्च एंड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी का अभियान


स्वदेश संवाददाता। भोपाल

टीकाकरण को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से सर्च एंड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी ने ’ट्रकों पर कोरोना शायरी’’ की अनूठी पहल की शुरूआत की है। सोसायटी ने कोरोना शायरी उसी रोचक और मौजी अंदाज में लिखी गई है जैसी कि ट्रकों के पीछे लिखी शायरी को पढ़ते हैं। इसमें अनेक भावों के साथ वैक्सीन लगवाने और मास्क का निरंतर उपयोग करने के संदेश है।

ट्रक, बस, ट्रेक्टर, ट्रॉली जैसे वाहन गांव-शहरों से होते हुए पूरे देश में जाते हैं। इस तरह से लोगों को जागरूक करने के लिए एक बेहतर माध्यम भी माना गया है। लोक संचार के माध्यमों जैसे कठपुतली, नुक्कड़ नाटक, लोक गीत और संगीत के माध्यम से भी निरंतर जागरुकता गतिविधियां की जा रही हैं। संयुक्त प्रशासन में महिला एवं बाल विकास परियोजना गोविंदपुरा के सीडीपीओ अखिलेश चंद्र चतुर्वेदी भी भरपूर सहयोग कर रहे हैं।

लोक संचार माध्यमों का उपयोग

ट्रक, बस, ट्रेक्टर, ट्रॉली जैसे वाहनों में कोरोना शायरी देखो मगर प्यार से, कोरोना डरता है वैक्सीन की मार से। मैं खूबसूरत हूं मुझे नजर न लगाना, जिंदगी भर साथ दूंगी, वैक्सीन जरूर लगवाना, हंस मत पगली, प्यार हो जाएगा, टीका लगवा ले, कोरोना हार जाएगा। टीका लगवाओगे तो बार-बार मिलेंगे, लापरवाही करोगे तो हरिद्वार मिलेंगे, यदि करते रहना है सौंदर्य दर्शन रोज-रोज, तो पहले लगवा लो वैक्सीन के दोनों डोज, टीका नहीं लगवाने से, यमराज बहुत खुश होता है। चलती है गाड़ी, उड़ती है धूल, वैक्सीन लगवा लो वरना होगी बड़ी भूल। बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला, अच्छा होता है वैक्सीन लगवाने वाला, कोरोना से सावधानी हटी, तो समझो सब्जी-पूड़ी बंटी। मालिक तो महान है, चमचो से परेशान है, कोरोना से बचने का, टीका ही समाधान है। मालिक का पैसा, ड्राइवर का पसीना, कोरोना का टीका, बच गई हसीना। छोड़ो अफवाहें, लगवाओ वैक्सीन, भागेगा कोरोना, जिंदगी होगी हसीन। देखो मगर प्यार से, कोरोना डरता है वैक्सीन की मार से, इत्यादि।

इन्होने बताया

कई ऐसी शायरी पढ़ते है, जो सामजिक जागरुकता का सन्देश देते है, कई बार राजनीति से प्रेरित शायरी पढ़ते है, कुछ शायरी में ड्राइवरों का दर्द झलकता है तो कुछ में मौज मस्ती होती है। इनकी भाषा, शैली और अंदाज के कारण यह लोगों गुदगदाती हैं और लंबे समय तक याद भी रहती है, यह संचार का बेहद प्रभावी माध्यम हैं। ट्रक, बस, ट्रेक्टर, ट्रॉली जैसे वाहनों में ’कोरोना शायरी’ लिखने का अभियान चलाया जा रहा है।
-डॉ मोनिका जैन, अध्यक्ष
सर्च एंड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी

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