Home भोपाल लॉकडाउन व प्रतिबंध लगने से 60 फीसद ही हुआ कारोबार: कोरोना ने...

लॉकडाउन व प्रतिबंध लगने से 60 फीसद ही हुआ कारोबार: कोरोना ने फींकी हुई होली की रंगत, बाजारों से भीड़ गायब

10
0
  • दुकानें सजीं लेकिन नदारद है खरीददार

भोपाल। राजधानी में कोराना वायरस के कारण होली के बाजार की रंगत को फींका कर दिया है। शहर के बाजार से ग्राहकों की भीड़ गायब है। कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंधों के ग्राहक बाजार जाने से कतरा रहे हैं। इसका असर व्यापारियों के धंधे पर पड़ रहा है। होली के मौके पर रंग-पिचकारी की राजधानी में 20 थोक दुकानें हैं, जबकि डेढ़ हजार से अधिक रिटेल दुकानें भी विभिन्न हिस्सों में लगी हुई है। थोक दुकानों से शहर समेत 200 किमी के दायरे में पिचकारी व रंग भेजे जाते हैं। हर साल पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार होता है।

कोरोना का असर कारोबार पर

व्यापारियों का कहना है कि अबकी बार कोरोना संक्रमण की वजह से कारोबार पर असर पड़ा है। लॉकडाउन व प्रतिबंध लगने से 60 फीसद ही कारोबार हुआ है। पिछले साल की तरह इस साल भी होली के त्यौहार पर लॉकडाउन लगाया जा रहा है, इसका सीधा असर व्यापारियों के धंधे पर पड़ रहा है। प्लास्टिक महंगा होने से भले ही पिचकारियों की कीमत 30 फीसद तक बड़ी हो, पर कारोबार पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। होली के दो दिन पहले शनिवार को नए-पुराने शहर के कई क्षेत्रों में रंग-पिचकारियों की जमकर खरीदारी हुई। बच्चों को पबजी, डोरेमोन, छोटा भीम, लाइटिंग, मोबाइल गन, पंप, एडवेंचर आदि पिचकारियां भा गईं तो खुशबू वाले रंग भी खूब पसंद किए गए। पुराने शहर के मारवाड़ी गली, कोतवाली रोड स्थित थोक व रिटेल दुकानों पर पूरे दिन पिचकारी व रंगों की खरीदारी होती रही।

प्लास्टिक की कीमतों में आया उछाल

अबकी बार प्लास्टिक की कीमतों में खासा उछाल आया है। जिसका असर पिचकारियों पर भी पड़ा है और कीमत 30 फीसद से अधिक बढ़ गए हैं। पिछले साल तक जो पिचकारी 120 रुपये में मिल रही थी, वह इस बार 150 रुपये में मिली। थ्री-डी लुक में आई पबजी पिचकारी की कीमत 350 से 800 रुपये तक रही। वहीं पंप, टैंक आदि की कीमत 120 से 900 रुपये तक थी। बच्चों ने गन वाली पिचकारियां भी खूब पसंद की। पुराने शहर के व्यापारी पंकज जैन ने बताया कि अबकी बार फलों की खुशबू वाले रंग आए हैं। ये त्वचा के लिए खतरनाक नहीं होते और इन्हें लगाने पर आम, संतरा आदि फलों की खुशबू आती है। यह रंग भी लोगों ने पसंद किए। इसकी कीमत 150 से 200 रुपये तक रही। हर्बल व खुशबू देने वाले रंग व गुलाल की मांग भी अधिक रही।

कंडे और गेहूं की बाली की हुई बिक्री

कोरोना वायरस को भगाने के लिए एवं हरे-भरे पेड़ों को कटने से बचाने के लिए इस कई संगठनों ने कंडों की होली जलाकर पर्यावरण संरक्षित करने का प्रयास किया है। ऐसे ही संगठनों द्वारा चलाए गए जागरुकता कार्यक्रम के चलते इस बार कई हिंदू संगठनों ने लोगों से कंडों की होली जलाने का आग्रह किया है। इसका असर शहर के बाजारों में भी देखने को मिला। बाजारों में कंडों के हाथठेलों पर खरीदादारों की भीड़ देखी गई। मोहल्लों में भी घूम-घूमकर भी ठेले पर कंडे बेचे गए और लोगों ने पर्यावरण बचाने कंडे जलाकर होली पर्व मनाने की तैयारी कर रखी है। कंडे के साथ गेहूं की बालियां भी लोगों ने बाजार से खरीदी, जो कि पूजा करने की काम आती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here