Home भोपाल प्रदेश के 23 शिक्षकों को उत्कृष्ट कार्य करने पर मिला राज्यस्तरीय सम्मान

प्रदेश के 23 शिक्षकों को उत्कृष्ट कार्य करने पर मिला राज्यस्तरीय सम्मान

7
0
  • स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मंत्रालय में वर्चुअल आयोजित किए गए समारोह में किया सम्मानित

भोपाल। मंगलवार को मंत्रालय में 90 फीसदी या उससे अधिक वाले परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों को राज्यस्तरीय सम्मान से स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने नवाजा, जिनमें उज्जैन के प्राचार्य भरत व्यास, भोपाल के सुधाकर पाराशर को शाल-श्रीफल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कोरोना को दृष्टिगत रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया था। सभी जिलों के शासकीय विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक जिलों में स्थित एनआईसी वीसी रूम से वर्चुअली जुड़ें।

इनका हुआ सम्मान

राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार 2020 से मध्य प्रदेश के 23 शिक्षकों को नवाजा गया, इनमें आगर मालवा की अनीता जैन, अशोक नगर के शिवपाल सिंह यादव, बड़वानी के रामचंद्र चौहान, भिंड के सत्यभान सिंह भदौरिया, छतरपुर के संजय कुमार जैन, छिंदवाड़ा के अनिल कुमार कोठेकर, दतिया के डॉक्टर अनिल कुमार दुबे, देवास के विकास महाजन, डिंडोरी के संजय कुमार तिवारी, खंडवा के जगदीश गौर और नरेंद्र कर्मा, गुना के प्रकाश शर्मा, इंदौर की सुनयना शर्मा, नरसिंहपुर के नारायण प्रसाद गुप्ता, नीमच के शोएब खान, पन्ना के विनीत कुमार द्विवेदी, राजगढ़ के नरेंद्र कुमार राठौर, रतलाम के सुभाष कुमावत, रीवा के डॉक्टर नीरज कुमार पांडे, सागर की सरोज प्रजापति, सतना की डॉ अर्चना शुक्ला और शहडोल के श्रद्धानंद दुबे को शाल, श्रीफल, सम्मान राशि 25 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

टीकमगढ़ के संजय और छिंदवाडा के मो. शाहिद को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 के लिए पुरस्कृत किए गए जिला टीकमगढ़ के शिक्षक संजय कुमार जैन और जिला छिंदवाड़ा के मोहम्मद शाहिद अंसारी को एवं वर्ष 2019 के राष्ट्रीय शिक्षा सम्मान से सम्मानित रतलाम के शिक्षक डॉ ललित मेहता को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही शिक्षक दिवस 2020 के उपलक्ष में आयोजित ऑनलाइन राज्य स्तरीय शैक्षिक संगोष्ठी 2020 के दो विजेता शिक्षक शाजापुर के आशीष जोशी और शहडोल के रवि कुमार द्विवेदी को भी राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

इस तरह राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त 3 शिक्षक, राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान 2020 के लिए चयनित 23 शिक्षक, राज्य स्तरीय ऑनलाइन शैक्षिक संगोष्ठी के दो विजेता शिक्षक और 80 ऐसे शिक्षक और प्राचार्य जिनके स्कूल का विगत वर्ष परीक्षा परिणाम 90 फीसदी या उससे अधिक अथवा जिनके स्कूल के परीक्षा परिणाम में विगत 3 वर्षों से वृद्धि हुई हुई है, उनके नाम सम्मान के लिए डिस्प्ले किए गए एवं संबंधित जिले के कलेक्टोरेट में शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

राज्य मंत्री श्री परमार ने शिक्षकों के सम्मान उपरांत शाजापुर के प्राचार्य श्री क्रांतिविजय खेनवार और रतलाम के सुभाष कुमावत के विद्यालयीन शिक्षा व्यवस्था पर आधारित रिप्रेजेंटेशन को देखा और उनसे चर्चा भी की। इस अवसर पर आयुक्त लोक शिक्षण जयश्री कियावत, संचालक के के द्विवेदी और अपर संचालक कामना आचार्य सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने सभी शिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सभी शिक्षकों ने कोविड 19 महामारी के दौरान अपनी क्षमताओं से आगे बढ़कर कार्य किया। अपने नवाचारों और परिश्रम से बच्चों के शैक्षणिक कार्य को जारी रखा। आप सभी के प्रयास की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।

भारत की संस्कृति में गुरु-शिष्य परम्परा का गौरवशाली इतिहास रहा है। जब-जब राष्ट्र पर संकट आया है, शिक्षको ने ही देश का मार्गदर्शन किया है। कोरोना संकटकालीन परिस्थितियों में भी प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रखने के आप सभी के प्रयास और नवाचार प्रसंशनीय है। यह बात स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) एवं सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने मंत्रालय में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान 2020 कार्यक्रम में प्रदेश के उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों को सम्मानित करने के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान समाज में स्थापित करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे है। आपकी समस्याओं का विभिन्न माध्यमों और नीतियों के द्वारा निराकरण करना हमारी जिम्मेदारी है लेकिन इसके साथ ही आप सभी शिक्षको का कर्तव्य है कि प्रदेश के विद्यार्थियों के जीवन की उन्नति के लिए निरंतर प्रयास और नवाचार करें। आत्म-निर्भर भारत का निर्माण और भारत की विश्वगुरु के रूप में स्थापना शिक्षको के योगदान से ही संभव है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here