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टिश्यू कल्चर तकनीक का व्यापक प्रचार-प्रसार करें : सखलेचा

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भोपाल। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि टिश्यू कल्चर तकनीक का व्यापक प्रचार-प्रसार करें जिससे उद्यानिकी और वानिकी प्रजातियों के पौधों का उत्पादन बढ़े। श्री सखलेचा ने गत दिवस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) के औबेदुल्लागंज स्थित प्रो. टीएस मूर्ति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी स्टेशन में टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला और ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केन्द्र की विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों का अवलोकन किया। टिश्यू कल्चर तकनीक से बांस की प्रजातियों एवं उद्यान क्षेत्र में स्थित 100 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियों के आर्थिक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। मंत्री श्री सखलेचा ने केन्द्र के वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि स्थानीय नवयुवकों को अधिक से अधिक प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार उपलब्ध करायें। उन्होंने टिश्यू कल्चर तकनीक के प्रसार पर जोर दिया, ताकि उद्यानिकी एवं वानिकी प्रजातियों के पौधों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने मध्यप्रदेश में नेपियर घास उत्पादन में रोजगार की संभावनाओं का पता लगाने के लिए झांसी स्थित इंडियन ग्रासलैंड एंड फोडर रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईजीएफआरआई) के वैज्ञानिकों से संपर्क कर प्रोडक्शन इकॉनामिक्स पर कार्य करने का सुझाव भी दिया। परिषद् के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि बैम्बू मिशन के सहयोग से पराली एवं बांस अपशिष्ट से ब्रिकेट बनाने की मशीन लगाई जा रही है। ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केन्द्र में शिल्पियों और कारीगरों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से नवीन तकनीकों से परिचित कराया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार स्थापित करने में मदद करना है। केंद्र के प्रभारी और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश सक्सेना ने अवगत कराया कि टिश्यू कल्चर तकनीक से आयुर्वेदिक हर्बल पौधों को भी तैयार किया जा रहा है।

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