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आने वाला समय शोध का है: उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव

मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा की दुनिया के कई सारे देश भारत से ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारतीय भाषाओं में टेक्निकल और मेडिकल एजुकेशन की पढ़ाई संभव है, लेकिन ये सब संभव हुआ माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में। आने वाले समय में शोध व्यापकता की संभावनाएं बन रही हैं। माननीय मंत्री जी ने आह्वान किया की देश और समाज को आपकी जरूरत है। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में मेडिकल टूरिज्म की व्यवस्था जल्द ही कराने की बात कही। 

आत्म स्पर्शी उद्बोधन देते हुए मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के सह संगठन मंत्री ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक किसी चीज को देखते ही प्रश्न उठता है। इसी प्रकार जब हम अपने अंदर के आध्यात्मिक ज्ञान और बाहर के भौतिक ज्ञान से तंत्र ज्ञान होना चाहिए। यदि हम भौतिक ज्ञान से ही तंत्र ज्ञान लेंगे तो विनाश संभव ही है। यही कारण है कि दुनिया ने अब दो विशाल युद्ध झेले और तीसरा झेलने की ओर अग्रसर हैं।

यदि आप खुद से कार्य नहीं करेंगे तो लक्ष्य प्राप्ति नहीं हो सकती। मीडिया की चर्चा करते हुए माननीय ने कहा आज समाज में कुरीतियां है ये तो अखबार के पहले पेज से ही समझ आ जाता है। स्वामी विवेकानंद का प्रसंग बताते हुई मंथन करने पर जोर दिया। हम अभी स्वाधीन हुए स्वतंत्र होने के लिए खुद के तंत्र से देश चलना चाहिए। अभी तो भारत में किसी भी सेक्टर में भारतीय दिखती है। माननीय ने सभी शैक्षिक संस्थान चलाने वालों से निवेदन किया कि शिक्षा में बाजारवाद न होने दें। आचरण कई वर्षों बाद ही संस्कृति बनती है पहले हम दोनों हाथों को मिलाते हैं तो वो हाथ जोड़ना कहलाता है ,जबकि अब तो वही स्वागत की भारतीय संस्कृति बन गई है। शिक्षा व्यवस्था में वो दिन कब आयेंगे जब लोग अपनी समस्याएं लेकर विश्वविद्यालय विद्यालय के पास आयेंगे। शिक्षक तो जोड़ने वालें होते हैं तो फिर लोग क्यों डर रहें इसमें काम करना होगा। प्रधान मंत्री मोदी की चर्चा करते हुई मनुष्य की असीम संभावनाएं को नकारना अपराध है। मनुष्य निर्माण, समाज परिवर्तन शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य होना चाहिए। गुरु की महता बताते हुए श्री मान ने कहा की दुनिया में अभी तक एक भी व्यक्ति ने अपने आपको गुरु घोषित नहीं किया, गुरु बनना आसान नहीं है, लेकिन असंभव नही है। गुरु बनने के लिए मृत्यु तक सीखना पड़ता है। उचित शिक्षा से संस्कृति मिलती है, संस्कृति से विवेक आता है और यही विवेक से समृद्धि मिलती है। मानवता को बचाने के लिए वसुधैव कुटुंबकम् बोलने वाले भारत को बचाना होगा। विश्वगुरु बनाने का बीज विश्वविद्यालय में ही है।

सभा की अध्यक्षता कर रहे निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री भरत शरण सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति को सर्वप्रथम लागू करने वाले राज्यों में से एक है। जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि के लिए प्रसंग पेश करते हुए कहा कि हमें अपनी दृष्टि उत्तम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2047 के नेतृत्व कर्ताओं को यहीं विश्वविद्यालय ही तैयार कर सकते हैं। हमें ऐसे कार्यों को करने के लिए हमारे अंदर स्व की अनुभूति होनी चाहिए।

दुनिया के 80 प्रतिशत की जीडीपी रखने वाले जी 20 की मेजबानी भारत को मिला है। इसका विषय वसुधैव कुटुंबकम् रखा गया है। यानी भारत की नेतृत्व को दुनिया ने मान्यता दी है। 

 मध्य भारत प्रान्त मंत्री डॉ शिवकुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन से सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन के साथ हुआ। भारतीय शिक्षण मंडल का ध्येय वाक्य के द्वारा संगठन का परिचय कराया गया, इसके साथ ही संगठन गीत ने सभी को मोह लिया। कार्यक्रम में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसके जैन, सांची विश्वविद्यालय की कुल गुरु प्रो नीरजा गुप्ता ,राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुनील गुप्ता जी, भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय तिवारी जी ,माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के प्रो के जी सुरेश जी , निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के कुलाधिपति श्री श्री चोकसे जी आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे । आभार प्रदर्शन प्रो विकास चौहान ने एवं संचालन डॉ रमण मिश्रा ने किया ।

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