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ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बाढ़ से बांधों व नहरों को 816 करोड़ का नुकसान, मरम्मत कराने जल संसाधन मंत्री ने मुख्यमंत्री से मांगे 300 करोड़

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मरम्मत नहीं होने से 8 लाख हेक्टेयर खेत में आएगी सिंचाई में अड़चन
भोपाल।
भारी बारिश और बाढ़ के कारण ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की खराब हुई सिंचाई परियोजनाओं की मरम्मत को लेकर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुलाकात की है। मंत्री ने मख्यमंत्री को बताया कि विभाग के आंकलन के अनुसार ग्वालियर-चंबलव अन्य क्षेत्रों में बाढ़ व अतिवर्षा से छोटी-बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को करीब 816 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। मंत्री श्री सिलावट ने इन सिंचाई परियोजनाओं की मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री से 300 करोड़ रुपए जल्द स्वीकृत करने का अनुरोध किया है।

जल संसाधन मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल में मुख्यत: श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, अशोकनगर, गुना और दतिया सहित अन्य जिलों की लगभग 660 लघु सिंचाई योजनाएं और 38 मध्यम एवं वृहद परियोजनाओं के बांध एवं नहर प्रणालियों में अत्यधिक क्षति हुई है। इससे लगभग 8 लाख हेक्टर क्षेत्र में रबी की सिंचाई प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि कृषकों को रबी की फसल हेतु सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 15 अक्टूबर 2021 के पूर्व क्षतिग्रस्त नहरों एवं अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत का कार्य पूर्ण किया जाना अति आवश्यक है। मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि उनके द्वारा संपूर्ण अंचल में भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया गया है।

मंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण के आधार पर अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त बांधों, नहरों एवं अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत, पुनर्निर्माण एवं पुनस्र्थापन हेतु 816 करोड़ का आंकलन किया गया है। प्राक्कलन अनुसार धन राशि स्वीकृत करने तथा प्राथमिक आधार पर लगभग 300 करोड़ की राशि त्वरित रूप से स्वीकृत करने का अनुरोध किया।

बाढ़ से जगह-जगह से टूट गईं हैं नहरें
मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि अतिवृष्टि से बांधों एवं नहर प्रणालियों में अत्याधिक क्षति हुई है। ग्वालियर-चंबल अंचल के अपर ककेटो, ककेटो एवं हर्सी बांध, आबदा बांध एवं महुअर बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में अतिवृष्टि होने से बांध के डाउनस्ट्रीम में निर्मित गाईड वाल, स्ट्रिलिंग बेसिन, वेस्ट वियर के फॉल इत्यादि क्षतिग्रस्त हुये हैं। उन्होंने बताया कि इन बांधों की मर मत एवं पुनस्र्थापन में लगभग 85 करोड़ का व्यय संभावित है। इसी तरह श्योपुर, मुरैना एवं भिण्ड जिलों के 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई करने वाली चंबल नहर परियोजना सर्वाधिक रूप से प्रभावित हुई है। 169 किलोमीटर लंबी मुख्य सीआरएमसी लगभग 85 जगहों पर पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके अतिरिक्त डिस्टीब्यूटरी, माईनर एवं सब-माईनर नहरों में लगभग 20 प्रतिशत की क्षति हुई है। प्रारंभिक तौर पर 3200 किलोमीटर लम्बाई की नहर प्रणाली के सुधार कार्यों में लगभग 250 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

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