क्यों ड्रैगन ने अब तक नहीं किया वार अपने से 100 किमी दूर ताइवान पर ,जानें इसके पीछे की वजह को

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on pinterest
Pinterest
Share on pocket
Pocket
Share on whatsapp
WhatsApp

अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा की घोषणा से ही चीन अमेरिका को धमकियां दे रहा है और अब जब पेलोसी ताइवान की यात्रा कर चुकी है तो ऐसे में चीन ताइवान को लेकर धमकी भर लहाजा अपना रहा है। इसके लिए चीन के ताइवान की खाड़ी में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया। ऐसा बताया गया है कि चीनी सेना ने इस छोटे से द्वीप को छह जगह से घेर लिया है। इसके बावजूद उसने ताइवान पर अब तक आक्रमण नहीं किया है। आज हम जानेगें इसके पीछे का कारण…

1.चीन ताइवान की जनसंख्या में है कितना अंतर

चीन और ताइवान को विभाजित करने वाली ताइवान की खाड़ी महज कुछ 100 किलोमीटर ही चौड़ी है। इस खाड़ी के जरिए ही चीन की 139 करोड़ लोगों की आबादी ताइवान की 2.36 करोड़ की आबादी से अलग रहती है। इसका अंतर करने पर मालूम चलता है कि ताइवान के एक व्यक्ति के मुकाबले चीन के पास 65 लोगों की ताकत है।

2.दोनों की विचारधारा में है कितना अंतर?

चीन और ताइवान के तंत्र के साथ उसको चलाने की विचारधारा की बात करें, तो इन दोनों के टकराव के पीछे की एक बड़ी वजह है। जहां पर चीन पूरी तरह से एक तानाशाही देश है, तो वहीं ताइवान दुनिया के सबसे बेहतरीन लोकतंत्र व्यवस्था वाले देशों में शामिल है। ताइवान की इसी खूबी को लेकर चीन अधिकतर चिंतित रहता है। उसका डर है कि अगर ताइवान के सफल लोकतांत्रिक मॉडल की मांग चीन में उठने लगी तो यह कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को सीधा चुनौती होगी। ड्रैगन का दूसरा डर यह है कि अगर कुछ और देशों के लिए अगर ताइवान का लोकतंत्र उदाहरण बनता है तो उसके खुद के तानाशाही और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर दुनिया मुखर हो सकती है।

ये भी पढ़ें:  श्रीलंका में नाकाम हो रही है राजनीतिक स्थिरता लाने की कोशिशें , विपक्ष का नहीं मिल रहा है सरकार को सहयोग

3.चीन-ताइवान की सैन्य ताकत में कितना है अंतर

सैन्य बजट चीन और ताइवान की सैन्य ताकत की बात करें तो। चीन की वन चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान उसका ही हिस्सा है। लेकिन यहां का सिस्टम मेनलैंड चीन से बिल्कुल अलग है। इसलिए ताइवान को कई बार एक स्वायत्त क्षेत्र भी कहा जाता है। दोनों क्षेत्रों की ताकत का अंतर उनके रक्षा बजट से ही समझा जा सकता है। जहां 2022 में चीन ने 230 अरब डॉलर (करीब 18.25 लाख करोड़ रुपये) का रक्षा बजट तय किया था, वहीं ताइवान का रक्षा बजट महज 16.8 अरब डॉलर (करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये) रहा। यानी दोनों देशों के रक्षा बजट में ही 15 गुना से ज्यादा अंतर रहा।

ये भी पढ़ें:  पीएम शहबाज शरीफ ने जताई भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंधों की मंशा

4.सैनिकों का आंकड़ा

दोनों देश अगर युद्ध के हो जाएं तो , सैनिकों की तुलना पर मालूम चलता है कि जहां चीन के पास 20 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं तो वहीं ताइवान के पास 1 लाख 70 हजार सक्रिय सैनिक हैं। हालांकि, ताइवान के पास रिजर्व सैनिकों की संख्या चीन से तीन गुना है। जहां ताइवान के पास 15 लाख रिजर्व सैनिक हैं तो वहीं चीन के रिजर्व सैनिकों की संख्या 5 लाख 10 हजार है

चीन इस वक्त रक्षा बजट के मामले में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसके चलते दुनिया में युद्धक हथियारों के मामले में चीन काफी आगे है।
चीन और ताइवान के बीच टैंकों का फर्क करीब पांच गुना का है। चीन के पास मौजूदा समय में 5,250 टैंक हैं, वहीं ताइवान के पास 1,110 टैंक हैं।

तोपों के मामले में भी चीन काफी आगे है।

एयरक्राफ्ट की बात की जाए तो फाइटर जेट्स, कॉम्बैट हेलिकॉप्टर, चॉपर और ट्रांसपोर्ट जेट्स को मिलाकर चीन के पास 3285 विमानों का बेड़ा है, जबकि ताइवान के पास 741 युद्धक विमान हैं। अलग-अलग वर्ग में बांट लें तो चीन के पास 1200 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, वहीं ताइवान के पास 288 फाइटर जेट्स हैं। हेलीकॉप्टरों में भी चीन 912 की संख्या के साथ ताइवान के 208 से लगभग चार गुना है।
समुद्र में भी चीन की ताकत ताइवान से ज्यादा है। चीन के समुद्री बेड़े में 777 अलग-अलग तरह के पोत हैं, वहीं ताइवान के पास 117 पोत हैं। इनमें युद्धपोत, विमानवाहक पोत, सबमरीन से लेकर जासूसी पोत तक शामिल हैं।

ये भी पढ़ें:  चीन की धमकियों के बीच, अमेरिका बढ़ाएगा ताइवान के साथ कारोबार

क्या हो अगर चीन-ताइवान के युद्ध में जुड़ जाए अमेरिका?

चीन और ताइवान के बीच युद्ध में अगर अमेरिका दखल देता है तो चीन अपने आप ही काफी मुसीबत में पड़ जाएगा। दरअसल, ग्लोबल पावर इंडेक्स के हिसाब से अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है। अकेले उसके बजट को ही ले लिया जाए तो यह चीन से तीन गुना ज्यादा है। उसके सक्रिय और रिजर्व सैनिकों की संख्या तो जरूर चीन से कम है, लेकिन टैंकों, एयरक्राफ्ट के मामले में अमेरिका काफी आगे है। नौसैनिक बेड़े के मामले में भी अमेरिका चीन से पीछे है, लेकिन उसके पास आधुनिक सबमरीन, एयरक्राफ्ट कैरियर और डेस्ट्रॉयर चीन से काफी ज्यादा हैं। अमेरिका और ताइवान की मिलीजुली ताकत चीन पर काफी भारी पड़ सकती है।

Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.

Leave a Reply

Recent News

Related News