दुनिया के लिए क्यों जरूरी है, ताइवान

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पूरी दुनिया जब रूस और यूक्रेन के युद्ध से परेशान है। ऐसे में ताइवान पर चीन की हमले की अटकलों के बीच, द्निया के विश्लेषकों के दूवारा ये चिंता की जानें लगी है, कि अगर चीन ताइवान पर हमला कर देता है तो इसका असर द्निया पर क्या होगा ? दुनिया की राजनीति किन दो ध्रुवों में विभाजित होगी ? तो दुनिया में इसका क्या असर होगा? आज जानेगें हम….

क्यों है दुनिया को ताइवान की जरूरत

विश्लेषकों की मानें तो ‘यूं तो ताइवान एक छोटा सा द्वीप समूह है, लेकिन कई मामलों में अमेरिका जैसे बड़े देश भी इस पर आश्रित हैं। करीब 36 हजार किलोमीटर की दूरी में फैले ताइवान पर चीन अपना अधिकार बताता है। बार-बार कब्जे की कोशिश करता है। क्योंकि कई मायनों में ताइवान काफी अहम है।’ जिसे हम दो बिंदुओं में समझ सकते हैं।

1.ताइवान की भौगोलिक स्थिति:

चीन से ताइवान की दूरी 120 किलोमीटर है। समुद्र के बीच में स्थित ताइवान के एक तरफ चीन तो दूसरी ओर उत्तर-पूर्व में जापान और दक्षिण में फिलीपींस है। ताइवान पर चीन अपना अधिकार मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र देश के रूप में पेश करता है। ऐसे में चीन के विरोधियों के लिए सामरिक रूप से यह क्षेत्र काफी अहम हो जाता है।

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ताइवान दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के संधि स्थल पर स्थित है। ऐसे में इंडो पैसिफिक रीजन में सुरक्षा के लिहाज से इसे काफी अहम माना जाता है। इस इलाके में चीन का दबदबा है और वह आसपास के सभी छोटे द्वीपों और देशों पर अपना अधिकार बताता रहा है। चीन इंडो पैसिफिक रीजन में कृत्रिम द्वीप बनाने की कोशिश भी करता रहा है। ताइवान व अन्य छोटे द्वीप और देश इसका विरोध करते रहे हैं।

2.आर्थिक स्थिति:

ताइवान की आर्थिकी बहुत मजबूत है। साल 2021 के आंकड़ों की मानें तो ताइवान ने 786 अरब डालर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया है। रोजाना प्रयोग में लाए जाने वाले इलेक्ट्रानिक उपकरणों के चिप ताइवान में ही बनते हैं। मतलब चाहे आपका मोबाइल हो या स्मार्टफोन और लैपटॉप या फिर कार। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ताइवान में तैयार चिप का ही इस्तेमाल होता है। दुनिया के करीब दो तिहाई चिप बाजार पर ताइवान का ही कब्जा है।

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ताइवान में सेमीकंडक्टर भी खूब तैयार होते हैं। आधे से अधिक सेमीकंडक्टर बाजार पर ताइवान का कब्जा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से दिसंबर 2021 के बीच सेमीकंडक्टर के जरिए ताइवान ने करीब 53 अरब डालर की आय हासिल की। यही कारण है कि अगर ताइवान पर चीन का कब्जा हो जाएगा, तो दुनिया के इस अहम उद्योग पर चीन का कंट्रोल हो जाएगा। फिर चीन इसे अपनी तरह से नियंत्रित करेगा।

अमेरिका और ताइवान के बीच व्यापारिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। दोनों के बीच इकोनमिक प्रोस्पेरिटी पार्टनरशिप डायलाग होता है। ताइवान अमेरिका का आठवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अमेरिका ताइवान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अमेरिका ने 2019 में ताइवान में जिन वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात किया था उसके चलते लगभग दो लाख अमेरिकी रोजगार का सृजन हुआ था। वर्ष 2020 में ताइवान का अमेरिका में कुल निवेश 137 अरब डालर था।

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चीन ने हमला किया तो क्या-क्या दिक्कते आएंगी?

अगर चीन और ताइवान के बीच युद्ध होता है तो इसका केवल चीन और ताइवान पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर होगा । ताइवान सबसे ज्यादा सेमीकंडक्टर चिप तैयार करता है। ये सेमीकंडक्टर चिप सभी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में लगते हैं। फिर वह मोबाइल फोन हो, बैट्री, टीवी, फ्रीज या लैपटॉप हो। ये सारे जरूरी सामान प्रभावित हो जाएंगे। दुनिया की सबसे एडवांस चिप फैक्ट्री एक तरह से तबाह हो जाएगी। इसके अलावा पश्चिमी देशों का व्यापारिक रास्ता भी एक तरफ से प्रभावित होगा।

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