Home विदेश अटारी के रास्‍ते अफगानिस्तान भेजा जाएगा गेहूं और दवाएं

अटारी के रास्‍ते अफगानिस्तान भेजा जाएगा गेहूं और दवाएं

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  • पाक ने भारत को बेमन से रास्ता देने वाले फैसले की जानकारी दी


इस्लामाबाद। अफगानिस्तान को मानवीय आधार पर 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं और जीवनरक्षक दवाओं की सहायता पहुंचाने के लिए पाकिस्तान ने भारत को रास्ता देने की औपचारिक अनुमति दे दी है। यह जानकारी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर दी। बताया कि भारत सरकार को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को भारतीय आपूर्ति को सड़क मार्ग उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।

अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने वाले तालिबान के पास जनता को खिलाने के लिए अनाज नहीं है, इलाज के लिए दवाएं नहीं हैं। उसका खास दोस्त पाकिस्तान भी उसकी कोई मदद नहीं कर पा रहा है क्योंकि खुद पाकिस्तान भी कंगाली का सामना कर रहा है, ऐसे में तालिबान की भारत से मदद लेने की मजबूरी बन गई थी।

तालिबान सरकार की गुजारिश पर भारत सरकार ने उसे मुफ्त में गेहूं और जरूरी दवाएं देने का फैसला किया।
यह सामान सड़क मार्ग से अफगानिस्तान भेजा जाना है। तालिबान सरकार के कहने पर पाकिस्तान सरकार को न चाहते हुए अपने सड़क मार्ग के इस्तेमाल की अनुमति भारत को देनी पड़ी है। अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने इस बाबत इमरान से अनुरोध किया था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अफगान लोगों के साथ भाईचारे के रिश्ते को ध्यान में रखते हुए भारतीय सहायता सामग्री को अफगानिस्तान पहुंचाने की अनुमति दी गई है, लेकिन भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए मार्ग उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं दी गई है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत से गेहूं और दवाएं वाघा (अटारी) सीमा मार्ग के जरिये आएंगी।

बीते दस साल के दौरान भारत अफगानों को मुफ्त में खाद्यान्न उपलब्ध कराता रहा है। दस साल में भारत ने अफगानों को दस लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद्यान्न दिया है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र की अगुआई में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया था कि 2020 में भारत ने अफगानिस्तान को 75 हजार मीट्रिक टन गेहूं भेजा था। लेकिन कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जैसे ही तनाव आया, वैसे ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को सहायता भेजने का सड़क मार्ग बंद कर दिया।

इससे अफगानिस्तान की बहुत बड़ी आबादी के सामने पेट भरने का संकट पैदा हो गया। तालिबान के सत्ता पर काबिज होते ही पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान की सहायता बंद कर दी, तब यह संकट गंभीर हो गया। ठंडक का मौसम शुरू होते ही यह संकट और गंभीर हो गया और अफगानिस्तान में भुखमरी की आशंका जताई जाने लगी। इसी के बाद भारत ने मानवीय सहायता का फैसला किया।

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