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आतंकियों का टारगेट- ऐसी अफगान महिलाएं जो आगे बढ़ना चाहती हैं, 2001 के बाद आगे बढ़ने वाली महिलाओं की हिटलिस्ट बनाई

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अमेरिकी सेना जैसे-जैसे अफगानिस्तान से अपना सामान समेट रही है, वैसे-वैसे आतंकी हमले बढ़ते जा रहे हैं। शनिवार को राजधानी काबुल में सैय्यद-उल-शुहादा हाईस्कूल के बाहर बम ब्लास्ट में मृतकों की संख्या 53 हो गई है। हमला जब हुआ तब बच्चे स्कूल से लौट रहे थे। गृह मंत्रालय के अनुसार मृतकों में अधिकतर 11 से 15 साल की लड़कियां हैं।

मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक अरियान ने बताया कि घायलों की संख्या 100 के पार है। इस स्कूल में लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं, पर सभी की टाइमिंग अलग है। ये स्कूल तीन शिफ्ट में काम करता है। छात्राएं दूसरी शिफ्ट में पढ़ती हैं, हमला उसी वक्त हुआ जब छात्राएं छुट्‌टी के बाद घर लौट रही थीं।

हमले का बाद अमेरिका-तालिबान के बीच हुए सीज फायर भी सवालों में है। दूसरी ओर, इस्लामिक स्टेट देश में नेटवर्क मजबूत करने में लगा है। ऐसे में आगे बढ़ने का सपना देखने वाली अफगान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताएं सही साबित हो रही है।

इनका कसूर क्या था?

आगे बढ़ना चाहती थीं इसलिए 400 महिलाओं को मार डाला

अफगानिस्तान में महिलाएं सिर्फ एक ही चिंता है- अमेरिकी सेना के जाने के बाद उनका क्या होगा। अफगानिस्तान में स्थित यूएन मिशन के अनुसार 2020 में आतंकियों ने आगे बढ़ने का सपना देखने वाली वाली करीब 400 महिलाओं की हत्या की। इनमें पत्रकार, उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। तालिबान ने 2001 के बाद आगे बढ़ने वाली महिलाओं की हत्या करने के लिए हिटलिस्ट भी बना रखी है।

एक माह से ऐसा कोई दिन नहीं, जब ब्लास्ट न हो रहा हो

अफगानिस्तान में पिछले करीब एक माह में 428 सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक तालिबान के हमले में मारे गए हैं। वहीं 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 190 जगह विस्फोट हुए हैं। ज्यादातर हमले उरुजगन, जाबुल, कंधार, नानगरहर, बदख्शान और ताखर क्षेत्र में हुए हैं। कुंनार प्रांतीय परिषद के सदस्य नासिर कामवाल कहते हैं कि कुनार में ऐसा कोई दिन नहीं देखने के मिल रहा जब कहीं न कहीं ब्लास्ट न हो रहा हो।

शिया बहुल इलाकों में किया हुआ है हमला

हमला शिया बहुल इलाके में हुआ है। हालांकि, तालिबान ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, पर घटना की निंदा भी नहीं की है। वैसे यह इलाका शिया मुसलमानों पर हमलों के लिए कुख्यात है। यहां हमलों की जिम्मेदारी अक्सर इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठन लेते हैं। कट्टर सुन्नी मुस्लिम समूह ने अफगानिस्तान के शिया मुस्लिमों के खिलाफ जंग की घोषणा की हुई है।

1 मई को वापसी का अल्टीमेटम देकर, 30 अप्रैल से हमले तेज किए

1 मई तक तालिबान के आतंकियों ने अमेरिका को अपनी सेना अफगानिस्तान से हटाने का अल्टिमेटम दिया था। 25 अप्रैल से अमेरिका ने वहां से अपनी सेना हटानी शुरू कर ली, पूरा जंगी सामान और जवान 11 सितंबर तक लौटेंगे। 30 अप्रैल को लोगर प्रांत में एक गेस्ट के बाहर ट्रक में विस्फोटक भरकर उसे उड़ा दिया। हमले में 27 छात्र मारे गए। 2 मई बदख्शान प्रांत के वारदूज में आतंकियों ने सेना के एक महत्वपूर्ण पुल पर कब्जा कर लिया, 8 जवानों को मार दिया। 6 मई को गजनी में तालिबानियों ने एक चेकपोस्ट और मिलिट्री बेस पर कब्जा कर लिया। 8 जवानों को सरेंडर करना पड़ा। 1 हफ्ते में तालिबान आतंकियों के अलग-अलग हमलों में सुरक्षाबलों के 140 जवान और 44 आम नागरिक मारे गए हैं।

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