अब राजनीति में नहीं घूमेगा बाजवा की किस्‍मत का पहिया, विदाई भाषण में दिए संकेत

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कमर जावेद बाजवा ने कहा कि ऐसी गलतियों से देश को सीख लेना होगा ताकि यह आगे बढ़ सके। 29 नवंबर बो बाजवा रिटायर हो रहे हैं। साल 2016 में तीन साल के लिए सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2019 में उन्हें तीन साल का सेवा विस्तार मिला था।
इस्‍लामाबाद ।
पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के विदाई संबोधन से यह सुनिश्‍च‍ित हो गया कि राजनीति में अब उनकी किस्‍मत धूमिल हो गई है। 23 नवंबर को बाजवा ने अपने विदाई संबोधन में कहा कि सेना ने राजनीति से दूर जाने का फैसला ले लिया है और उम्‍मीद करते हैं कि राजनीतिक दल भी इसे मानेंगे। पाकिस्‍तानी मीडिया वेबसाइट डॉन के अनुसार, ‘यह हकीकत है कि हर सिविल सोसायटी और राजनीतिक दलों समेत सभी संस्‍था से गलतियां होती हैं। थिंक टैंक पॉलिसी रिसर्च ग्रुप (POREG) ने यह जानकारी दी। बता दें कि POREG थिंकटैंक 1973 में स्थापित हुआ था। यह एक गैर-लाभकारी, गैर-पक्षपातपूर्ण, स्वतंत्र संस्थान है।
राजनीति से दूर जाने का सेना ने लिया फैसला
चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ ने कहा कि ऐसी गलतियों से देश को सीख लेना होगा ताकि यह आगे बढ़ सके। 29 नवंबर बो बाजवा रिटायर हो रहे हैं। साल 2016 में तीन साल के लिए सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2019 में उन्हें तीन साल का सेवा विस्तार मिला था।
बाजवा ने राजनीति में सेना के हस्तक्षेप को स्वीकारा
बाजवा के संबोधन से राजनीति में सेना का दखल स्‍पष्‍ट हो गया। दरअसल उन्‍होंने कहा कि सेना ने राजनीति से दूर रहने का फैसला लिया है। उन्‍होंने कहा कि दुनिया में सेनाओं की आलोचना नहीं होती है लेकिन पाकिस्‍तानी सेना हमेशा से राजनीति में दखल के कारण ही निंदा का पात्र रही है। बता दें कि राजनीतिक मामलों में दखल देने वाले बाजवा न तो पाकिस्‍तान के पहले आर्मी चीफ हैं और न ही आखिरी। बाजवा के इस बयान से पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भी धक्‍का लगा है। सार्वजनिक तौर पर उन्‍होंने सेना पर आरोप लगाते रहे हैं। जनरलों के खिलाफ जाने वाले पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं। ऐसे प्रधानमंत्र‍ियों की लंबी लिस्‍ट है जो अपने कार्यकाल के दौरान आर्मी के खिलाफ रहे हैं।

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