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पाकिस्तान: सेना की आलोचना करने पर दो वर्ष कैद या पचास हजार जुर्माना, मंत्री ने बताया ‘हास्यापद’

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सेना के बचाव में एक नए कानून को लाने की तैयारी की जा रही है जिसे यहां के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने हास्यास्पद बताया है। दरअसल, देश की सेना अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने के लिए कानून को सहारा बनाना चाहती है। बता दें कि संसद की स्थायी समिति ने इससे जुड़े बिल को मंजूरी भी प्रदान कर दी है।

बिल का हो रहा विरोध

केंद्रीय मंत्री, विपक्षी नेता और कानूनी बिरादरी से जुड़े लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा है कि आलोचना को अपराध ठहराए जाने का विचार पूरी तरह हास्यापद है। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि सम्मान अर्जित किया जाता है, इसे किसी से जबरदस्ती हासिल नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान बार काउंसिल ने सरकार से यह बिल वापस लेने की अपील की है। बता दें कि प्रस्तावित बिल यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर सेना का उपहास उड़ाता है तो उसे दो वर्ष कैद या पचास हजार जुर्माना भुगतना पड़ेगा।

विवादित बिल को मंजूरी

प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के राजा खुर्रम नवाज की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने बुधवार को पाकिस्तान दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता में संशोधन करने वाले बिल को मंजूरी प्रदान कर दी थी। इसका उद्देश्य उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है, जो जानबूझकर सेना का उपहास उड़ाते हैं। लोगों को डर है कि यदि यह बिल कानून बन जाता है तब सरकार असंतुष्टों की आवाज दबाने के लिए इसका दुरुपयोग कर सकती है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के आगा रफीउल्लाह और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज मरियम औरंगजेब के एतराज के बावजूद सांसद अमजद अली खान ने इस विवादित बिल को मंजूरी प्रदान कर दी थी।

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