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तालिबान के बढ़ते कदमों की आहट से परेशान ताजिकिस्‍तान, इतिहास में पहली बार सुरक्षा की सबसे बड़ी कवायद

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दुशांबे । अफगानिस्‍तान तालिबान के बढ़ते कदमों ने सभी पड़ोसी देशों को चिंता में डाला हुआ है। ताजिकिस्‍तान भी इससे अछूता नहीं रहा है। आपको बता दें कि अफगानिस्‍तान की उत्‍तर और उत्‍तर पश्चिम की सीमा तुकमेनिस्‍तान, उजबेकिस्‍तान और ताजिकिस्‍तान से मिलती है। ताजिकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान की करीब 1357 किमी की सीमा आपस में मिलती है। अमेरिका के मुताबिक तालिबान अफगानिस्‍तान के करीब 50 फीसद इलाके पर अपना कब्‍जा जमा चुका है। वहीं तालिबान की मानें तो वो देश के करीब 80 फीसद इलाकों पर कब्‍जा कर चुका है। तालिबान की इसी बढ़त ने ताजिकिस्‍तान की चिंता को बढ़ा दिया है। इसको देखते हुए अब ताजिकिस्‍तान ने सोवियत संघ से अलग होने के बाद सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ी कवायद शुरू कर दी है। उसने अपनी सेना को सीमा पर तैयार रहने का आदेश दिया है। इसके लिए करीब 2.30 लाख जवानों को तैयार रखा गया है। इसका आदेश राष्‍ट्रपति इमोमाली रखमोन ने दिया है। राजधानी दुशांबे में ही करीब 20 हजार जवानों की तैनाती की गई है। सोवियत संघ से अलग होने के बाद इसको सबसे बड़ी सुरक्षा कवायद का नाम दिया गया है। राष्‍ट्रपति ने दिए अपने आदेश में सेना को अपने हथियारों की जांच करने और इन्‍हें कार्रवाई के लिए तैयार रखने को भी कहा है। ग्राउंड पर आर्टिलरी के अलावा एयरफोर्स को भी तैयार रहने के आदेश दिए गए हैं। राष्‍ट्रपति ने टीवी पर दिए एक संदेश में कहा है कि पड़ोसी देश अफगानिस्‍तान में हालात हर रोज खराब हो रहे हैं। लिहाजा इस क्षेत्र की हिफाजत और स्थिरता के लिए सुरक्षाबलों को अलर्ट पर रखा गया है। राष्‍ट्रपति ने ये भी साफ कर‍ दिया है कि उन्‍होंने अपने आदेश में सेना को अपनी सर्वोत्‍तम तैयारी करने का आदेश दिया है। उन्‍होंने कहा कि हर हाल में सीमाओं की रक्षा को सुनिश्चित किए जाने की सख्‍त जरूरत है। आपको बता दें कि अगले माह रूस और उजबेकिस्‍तान ताजिकस्‍तान की सीमा पर मिलिट्री ड्रिल भी करने वाले हैं। ताजिकिस्‍तान सोवियत रूस से वर्ष 1994 में आजाद हुआ था। अफगानिस्‍तान के मुद्दे पर ताजिकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लदिमीर पुतिन से भी बात की है। वहीं तालिबान ने रूस की समाचार एजेंसी से कहा है कि अफगानिस्‍तान से लगती सीमाओं पर हालात पूरी तरह से काबू में हैं। आपको बता दें कि जब से अमेरिका ने अफगानिस्‍तान से अपनी फौजों को वापस ले जाने की शुरुआत की है तब से ही अफगानिस्‍तान में तालिबान के हमले काफी बढ़ गए हैं। कई सरहदी इलाकों में अफगानिस्‍तानी फौज ने बिना लड़ाई के ही घुटने टेक दिए हैं तो कुछ इलाकों में दोनों के बीच जबरदस्‍त ल़ड़ाई जारी है। कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां पर अफगानी सेना के जवान तालिबान के डर से पड़ोसी देशों की सीमाओं में घुस गए हैं। अफगानिस्‍तान के पड़ोसी देशों को इस बात की चिंता है कि कहीं तालिबान उनकी सीमाओं के अंदर किसी तरह की कोई घुसपैठ न कर जाए। इसके अलावा तालिबान के डर से भागने वाले अफगानी लोगों को भी रोकने के मद्देनजर ये कवायद की गई है।

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