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बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार सऊदी किंग सलमान से की बातचीत

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वॉशिंगटन/रियाद। 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालने वाले जो बाइडेन ने एक महीने से ज्यादा वक्त के बाद पहली बार सऊदी अरब के किंग सलमान से फोन पर बातचीत की। मिडल ईस्ट के अपने सबसे करीबी सहयोगी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का यह रवैया दुनिया को हैरान कर रहा है। इसमें भी दो बातें बेहद खास रहीं। पहली- सऊदी अरब की सत्ता अब किंग सलमान नहीं, बल्कि उनके बेटे प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के हाथों में है। दूसरी- MBS पर आरोप है कि उन्होंने वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खगोशी की हत्या में अहम रोल निभाया। इसलिए बाइडेन ने प्रिंस सलमान की जगह उनके पिता किंग सलमान से बातचीत की।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बाइडेन ने सऊदी किंग सलमान (75) को बता दिया है कि अमेरिकी सरकार प्रिंस सलमान के खिलाफ अपने नागरिक की हत्या में हाथ होने के आरोपों की जांच कराएगी। अगर ऐसा हुआ तो प्रिंस सलमान की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट जारी करेगा अमेरिका
जमाल खगोशी का कत्ल सऊदी अरब की तुर्की एम्बेसी में 2018 में किया गया था। ट्रम्प जब सत्ता में थे तो उनके सऊदी प्रिंस से करीबी रिश्ते रहे और यही वजह है कि उस दौरान खगोशी की हत्या से जुड़ी अमेरिकी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट जारी नहीं की गई। अब बाइडेन राष्ट्रपति हैं और मानवाधिकारों पर उनका रुख हमेशा से सख्त रहा है। माना जा रहा है कि इस इंटेलिजेंस रिपोर्ट में सीधे तौर पर खगोशी की हत्या के लिए प्रिंस सलमान का नाम लिया गया है। लेकिन, ये भी सच है कि सऊदी शासन की बागडोर अब किंग सलमान की बजाए प्रिंस सलमान के हाथ में है।
अमेरिका-सऊदी रिश्ते बिगड़ेंगे
अगर प्रिंस सलमान को बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन खगोशी की हत्या के मामले में आरोपी करार देता है तो यह तय है कि मिडल ईस्ट के सबसे ताकतवर और अमीर देश के रिश्ते अमेरिका से खराब हो जाएंगे। इसकी एक वजह यह है कि किंग सलमान 85 साल के बुजुर्ग हैं और सत्ता वास्तव में प्रिंस सलमान के हाथों में है। ये बात तो तय है कि बाइडेन ने किंग सलमान से बातचीत में खगोशी की हत्या और प्रिंस सलमान से जुड़े मामले की चर्चा जरूर की होगी, हालांकि व्हाइट हाउस इसे सामान्य बातचीत बता रहा है।
ईरान फैक्टर
अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई और इजराइल के लिए ईरान सबसे बड़ा खतरा है। अब अगर बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन सऊदी सरकार को नाराज करता है तो उसको इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। मिडल-ईस्ट में सऊदी अरब के बिना अमेरिका आगे नहीं बढ़ सकता। वहां उसके अनगिनत हित और मिलिट्री बेस भी है। अमेरिका भी तमाम पहलुओं पर विचार कर रहा है और इसीलिए विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बाइडेन से पहले सऊदी एडमिनिस्ट्रेशन से बातचीत की।
किंग सलमान कई बीमारियों से परेशान हैं और प्रिंस सलमान ही सऊदी सत्ता संभाल रहे हैं, ऐसे में अमेरिका अगर उनके खिलाफ कोई कदम उठाता है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

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