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म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर टूटा सेना का कहर, एक दिन में 82 लोकतंत्र समर्थकों की हत्या की

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यांगून। म्यांमार में सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को सैन्य तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कम से कम 82 लोकतंत्र समर्थकों को मार डाला। मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर नजर रखने वाले एक संगठन और स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह एक दिन में मारे गए लोगों की दूसरी सबसे अधिक संख्या है। इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद भी पूरे म्यांमार में सेना के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं।

बागो शहर में 82 प्रदर्शनकारियों की मौत

बताया जा रहा है कि बागो शहर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में शुक्रवार को 82 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। इससे पहले 14 मार्च को यांगून में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। यांगून से बागो करीब 100 किलोमीटर दूर है। हालांकि, पूरे देश में फैले हिंसक माहौल के कारण स्वतंत्र रूप से मौत के इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की जा सकी है।

मौतों के बाद भी नहीं थम रहा प्रदर्शनों का दौर

‘असिस्टेंस असोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स’ द्वारा संकलित शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 82 है। यह संगठन मरने वालों और गिरफ्तार लोगों की दैनिक संख्या जारी करता है। ये आंकड़े काफी व्यापक रूप से विश्वसनीय माने जाते हैं क्योंकि मौत के नए मामलों को तब तक शामिल नहीं किया जाता जब तक उनकी पुष्टि नहीं हो जाती और उनका विवरण वेबसाइट पर नहीं दे दिया जाता।

मरने वालों की संख्या बढ़ने का अनुमान

संगठन ने शनिवार की रिपोर्ट में कहा कि उसे बागो में मरने वालों की संख्या के और बढ़ने की आशंका है क्योंकि और मामलों का सत्यापन किया जाना बाकी है। ऑनलाइन समाचार वेबसाइट म्यांमा नाऊ ने भी 82 लोगों के मारे जाने की खबर दी है। उधर, पूरे म्यांमार में अब पुलिस की गोलीबारी में मरने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या 700 के करीब पहुंच रही है।

शुक्रवार को हान ले ने कहा कि उनका देश तख्तापलट के खिलाफ आंदोलनों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि मैं एक बात कह सकती हूं कि हम म्यांमार के नागरिक कभी हार नहीं मानेंगे। म्यांमार में अबतक सेना की फायरिंग में 550 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की तादाद हजारों में है। म्यांमार की तानाशाह सेना ने लोकतांत्रित तरीके से चुनी गई आंग सांग सू की की सरकार को सत्ता से बेदखल करते हुए देश में मिलिट्री रूल लगाने का ऐलान किया था। तब से ही म्यांमार में आंदोलनों का दौर जारी है। मानवाधिकार संगठन असिस्टेंस असोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स ने शनिवार को बताया कि मृतकों में 46 बच्चे हैं। करीब 2,751 लोगों को हिरासत में लिया गया या सजा दी गई। म्यांमार में जानलेवा हिंसा और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की धमकियां सेना को सत्ता छोड़ने और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे प्रदर्शनों को दबाने में नाकाम रही हैं।

म्यांमार की इस सुंदरी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने मुझसे कहा है कि वे सड़क पर लड़ेंगे और मैं भी अब मंच पर अपनी लड़ाई लड़ रही हूं। इसलिए, मुझे लगता है कि अगर उन्होंने हार नहीं मानी, तो हम जीतेंगे। इस दौरान उनकी आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे। गहरे दुख, आंसूओं से भरी आंखें और रूंधे गले के साथ हान ले ने पूरी दुनिया के सामने म्यांमार सेना की क्रूरता का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मैंने उस समय अपनी भावना को नियंत्रित किया क्योंकि मुझे पूरी दुनिया के सामने दो या तीन मिनट ही बोलने का समय दिया गया। उन्होंने बताया कि जब मैं अपने कमरे में आई तो पूरी रात रोती रही। अब मैं जब भी म्यांमार के बारे में बोलती हूं तो मेरे आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि मैं इस प्रतियोगिता पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाई।

हान ले ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान ब्यूटी क्वीन्स को हर बार मुस्कुराने की जरूरत होती है, हर व्यक्ति से बहुत ही व्यक्तिगत रूप से जुड़ना होता है। मैं यहां खुश नहीं रह सकती, क्योंकि इस दौरान मेरे देश में सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। इस ब्यूटी कांटेस्ट के आयोजक नवात इटारग्रेसिल ने कहा कि हान ले के इस भाषण के बाद वह म्यांमार वापस नहीं जा सकती हैं। अगर वह (अभी) म्यांमार वापस जा रही है, तो वह घर वापस नहीं जा रही है, वह जेल जा रही है।

म्यांमार में बिगड़ती स्थिति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर रही है। विशेष रूप से 27 मार्च को एक ही दिन में 110 लोगों की मौत के बाद चिंता काफी बढ़ गई है। यूरोपीय संघ ने इसे आतंक का दिन करार दिया है। लोकतंत्र समर्थकों पर हालिया बड़ा अत्याचार यांगून के दक्षिण डगन टाउनशिप में देखने को मिला है। यहां अपने आंखों से खौफनाक मंजर देखने वाले लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों के दौरान इलाके में सेना ने एक विशेष मुहिम को अंजाम दिया है, जिससे पूरा मोहल्ला दहशत में आ गया है। विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख समूहों में से एक द जनरल स्ट्राइक कमेटी ऑफ नेशनलिटीज ने सोमवार को म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से प्रदर्शनकारियों के पक्ष में खड़े होने का आग्रह किया। मंगलवार को इस तरह के तीन समूहों ने इस आह्रान का संज्ञान लिया है।

म्यांमार के बिगड़ते हालात से दुनिया परेशान
म्यांमार में बिगड़ती स्थिति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर रही है। विशेष रूप से 27 मार्च को एक ही दिन में 110 लोगों की मौत के बाद चिंता काफी बढ़ गई है। यूरोपीय संघ ने इसे आतंक का दिन करार दिया है। लोकतंत्र समर्थकों पर हालिया बड़ा अत्याचार यांगून के दक्षिण डगन टाउनशिप में देखने को मिला है। यहां अपने आंखों से खौफनाक मंजर देखने वाले लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों के दौरान इलाके में सेना ने एक विशेष मुहिम को अंजाम दिया है, जिससे पूरा मोहल्ला दहशत में आ गया है।

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