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कोरोना महामारी के बीच चीन के इस फैसले से बढ़ी भारत की मुश्किल

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भारत में दवा निर्माता लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि मालवाहक विमानों की उड़ानों पर चीन की रोक के कारण दुनियाभर में दवाओं की आपूर्ति संकट में पड़ सकती है. इससे भारत को तो दिक्कत हो ही रही है, जिन देशों को भारत दवाएं निर्यात करता है, उनके लिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है. दवाओं की आपूर्ति के लिए अमेरिका भी भारत पर बहुत हद तक निर्भर है और अगर उत्पादन में कमी आई तो कई दवाओं की किल्लत का संकट खड़ा हो जाएगा. 

असल में, भारत में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के बाद चीन की सरकारी सिचुआन एयरलाइंस ने अगले 15 दिनों के लिए अपनी कार्गो फ्लाइट्स पर रोक लगा दी थी. भारतीय औषधि निर्माता संघ (IDMA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश दोषी ने बताया कि चीन भारत के दवा निर्माताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल की 60 से 70 फीसदी और साथ ही दुनियाभर के बाजारों में भेजी जाने वाली दवाओं के लिए सामग्री की आपूर्ति करता है. को लिखे पत्र में महेश दोषी ने कहा कि यदि चीन ने अपनी कार्गो फ्लाइट्स पर इसी तरह रोक लगाए रखी तो दुनियाभर में दवाओं की आपूर्ति प्रभावित  होगी. उन्होंने कहा कि इससे आवश्यक दवाओं की घरेलू कमी हो सकती है और निर्यात पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. कार्गो फ्लाइट्स कब शुरू होंगी, सिचुआन एयरलाइंस की तरफ से इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाया है.  

आमतौर पर दवा निर्माता इस बात को गुप्त रखते हैं कि दवाओं का उत्पादन कहां किया जा रहा है. हालांकि अमेरिका का यूएस फार्माकोपिया, जो उद्योग को गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखने में मदद करता है, ने एक परियोजना शुरू की है ताकि ज्यादा से ज्यादा दवाओं का प्रोडक्शन किया जा सके. यूएस फार्माकोपिया की प्रवक्ता ऐनी बेल ने बताया कि संगठन के मेडिसिन सप्लाई मैप ने उन स्थानों की शिनाख्त की है जहां 77 फीसदी जेनेरिक दवाएं तैयार की जाती हैं. 

ऐनी बेल ने बताया कि 62 ऐसी जेनेरिक दवाएं हैं जो केवल भारत में ही तैयार होती हैं. इनमें कई एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल्स दवाएं भी शामिल हैं. कोरोना महामारी के कारण दवाओं के स्टॉक में कमी की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे लेकर अब चिंतित हो रहे हैं. पिछले साल अमेरिका में जब कोरोना कहर बरपा रहा था और चीन में लॉकडाउन था तो अमेरिका में कई दवाओं की कमी हो गई थी. इनमें इनहेलर्स से लेकर नींद, डिप्रेशन तक की दवाएं शामिल थीं.  

अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेल्थ-सिस्टम फार्मासिस्ट के साथ काम करने वाले विशेषज्ञ एरिन फॉक्स कहते हैं कि कार्गो फ्लाइट्स पर रोक ने पिछले साल के हालात की याद दिला दी, जब अमेरिका में दवा की कमी हो रही थी और चीन की स्थिति को लेकर भी लोग चिंतित हो रहे थे. एरिन फॉक्स यूनिवर्सिटी ऑफ उटा के ड्रग शॉर्टेज एक्सपर्ट हैं. सिचुआन एयरलाइंस के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि वहां (चीन) बहुत अस्पष्टता है, हम वास्तव में नहीं जानते कि हम कैसे प्रभावित हो सकते हैं? हम इसमें बहुत कुछ नहीं कर सकते.

दक्षिण एशिया में यूएस फार्माकोपिया की क्षेत्रीय महाप्रबंधक सरिषा यदलापल्ली कहती हैं कि वह भारत में मेडिसिन इंडस्ट्री को देखकर खुश हैं, लेकिन अभी तक इसका निगेटिव प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन कहा जा रहा है कि अगर सिचुआन एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों पर ऐसे ही रोक लगाए रखी तो इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.  

यदि भारत में दवा का उत्पादन धीमा होता है, तो वैश्विक स्तर पर इसके अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं. भारत में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड जैसी कंपनियां अमेरिकियों द्वारा ली जाने वाली महत्वपूर्ण जेनेरिक दवाएं बनाती हैं. इस समय कई अमेरिकी और यूरोपीय दवा निर्माताओं ने कम मजदूरी और आसान नियमों के चलते भारत में अपनी कंपनियां स्थापित की हैं.  

पिछले सप्ताह भारत में चीन के राजदूत सन वेइडॉन्ग ने भारत के समर्थन में ट्वीट किया था. उन्होंने कहा कि चीन चिकित्सा आपूर्ति के लिए भारत की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित कर रहा है. शनिवार को वेइडॉन्ग ने बताया था कि पिछले दो हफ्तों में चीन और भारत के बीच 61 कार्गो उड़ानें संचालित हुई हैं. 

इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस के सुदर्शन जैन और इंडियन ड्रग मैनुफेक्टरर के कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार मदान बताते हैं कि भारत में अभी 40 लाख लोग दवा इंडस्ट्री में काम करते हैं. कोरोना के चलते दवा कंपनियों में काम करने वाले लोगों की उपस्थिति थोड़ी कम हुई है, लेकिन इससे दवा निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. लेकिन कुछ राज्यों में आंशिक तो कहीं पूरी तरह से लॉकडाउन लगा हुआ है.  

यदि स्थिति और बिगड़ती है तो और अधिक कामगार फैक्टरियों में काम के लिए नहीं जा पाएंगे. अमेरिकी फार्माकोपिया के अनुसार, भारत में दवा बनाने वालीं 32% फैक्ट्रियां लॉकडाउन का सामना कर रही हैं जहां लगभग 6% वैश्विक उत्पादन होता है. बहरहाल दवा कंपनियां अपने श्रमिकों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए तमाम कदम उठा रही हैं ताकि दवा का उत्पादन प्रभावित न हो. 

चीन की सिचुआन एयरलाइंस ने भारत आने वाली सभी कार्गो फ्लाइट पर अगले 15 दिन के लिए रोक लगा दी थी. इन कार्गो फ्लाइट के द्वारा भारत की कई निजी कंपनियां चीन से ऑक्सीजन कंट्रेटर और कई अन्य जरूरी मेडिकल डिवाइस मंगाने वाली थीं. सिचुआन एयरलाइंस से जुड़ी कंपनी सिचुआन चुआनहांग लॉजिस्टिक कंपनी का कहना था कि एयरलाइंस ने कुल छह रूट पर अपने कार्गो फ्लाट निलंबित किए हैं. यह चीन की एक सरकारी विमान कंपनी है. इसकी वजह से निजी क्षेत्र द्वारा चीन से कोविड संबंधी मेडिकल सप्लाई मंगाने में काफी अड़चन आ रही है.

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