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चीनी सैन्य विशेषज्ञ का एलएसी पर बफर जोन बनाने का प्रस्ताव, तनाव कम करने का दिया सुझाव

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बीजिंग। चीन के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने पिछले साल गलवन में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के एक साल पूरा होने पर भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर उपजे तनाव को कम करने के लिए ‘साहसिक कदम’ उठाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि एलएसी पर ‘सबसे खतरनाक क्षेत्रों’ में बफर जोन बनाए जाएं, ताकि आगे फिर कभी ऐसी तनावपूर्ण स्थिति नहीं पैदा हो।

हांगकांग से प्रकाशित एक समाचार पत्र में मंगलवार को ‘चीन और भारत को सीमा गतिरोध पर आगे बढ़ने के लिए अतीत पर विचार करना चाहिए’ शीर्षक वाले आलेख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वरिष्ठ कर्नल (सेवानिवृत्त) झाउ बो ने कहा, ‘यह जानलेवा घटना खौफनाक थी जो बल प्रयोग नहीं करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी दशकों पुरानी सहमति को तोड़ने के करीब थी।’

यहां सिंगुआ विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजी में सीनियर फेलो बो ने तनाव घटाने के लिए अपने प्रस्तावों वाले आलेख में कहा, ‘घातक सीमा झड़प के सदमे के साल भर बाद अब भी काफी तनाव बना हुआ है क्योंकि असत्यापित एलएसी को लेकर मुद्दों का समाधान करने के तरीकों पर सहमति नहीं बनी है।’ बो ने विवाद को टकराव का रूप लेने से रोकने के सवाल पर पूर्वी लद्दाख में शेष इलाकों से सैनिकों की वापसी की भारत की मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘इन समझौतों में दोनों देशों ने एक बार फिर से यह दोहराया कि वे एलएसी पर अपने-अपने सैन्य बलों को घटाएंगे या सीमित कर न्यूनतम संख्या पर ले जाएंगे।’

उन्होंने कहा, ‘असल में, दोनों पक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। संकट के मद्देनजर इसमें आश्चर्य करने की कोई बात नहीं है, लेकिन जब माहौल ठंडा हो गया है तब दोनों देशों को इस बारे में सोचना चाहिए कि वे किस तरह से सीमावर्ती इलाकों को शांतिपूर्ण और स्थिर बना सकते हैं।’ बो ने कहा कि शायद सर्वाधिक साहसिक कदम एलएसी से लगे इलाके में सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्रों में बफर जोन बनाना हो सकता है। टकराव को रोकने के लिए यह सर्वाधिक प्रभावी तरीका है।’

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष इस पर सहमत हुए हैं कि एलएसी के जिन इलाकों में साझा सहमति नहीं है उन इलाकों में वे गश्त नहीं करेंगे। बफर जोन बनाना इसी दिशा में आगे बढ़ने का एक कदम है और यह संभव भी है।’ उन्होंने कहा कि एक अन्य तरीका संयुक्त कार्यकारी समहू को बहाल करना और कूटनीतिक एवं सैन्य विशेषज्ञों को इसके तहत कार्य करने के लिए कहना है, ताकि विश्वास बहाली सहमतियों में आसान लक्ष्य हासिल किए जा सके। विश्वास बहाली के नए उपायों पर भी काम करना चाहिए।

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