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क्या होता है रीढ़ की हड्डी का टीबी?

टीबी को माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस कहा जाता है। हम ये जानते हैं कि टीबी फेफड़ों में होता है लेकिन रीढ़ की हड्डी में भी टीबी होता है। रीढ़ की हड्‌डी में होने वाला टीबी इंटर वर्टिबल डिस्क में शुरू होता है, जिसके बाद रीढ़ की हड्‌डी में फैलता है। सही समय पर इलाज न किया जाए, तो अपाहिज भी हो सकते हैं। आजकल युवाओं में इसकी संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
लक्षण
शारीरिक कमजोरी महसूस करना.
भूख न लगना.
बुखार आना.
साइनस संबंधी परेशानियां होना.
शरीर के निचले हिस्से में लकवा आना.
मूत्राशय संबंधी परेशानियां.
वजन कम होना.
रात के समय बुखार आना.
दिन में बुखार उतर जाना.
मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं.
हड्डी कमजोर हो जाती है.
शीत फोड़ा बन जाता है.
साल 2016 की बात है, सर्दियां काफी थी और मैंने महसूस किया कि मुझे कमर में अजीब सा दर्द हो रहा है..जो हर रात बढ़ता ही जा रहा था, महीना जाते जाते दर्द और बढ़ गया, काम करने में भी मुश्किल आने लगी, मीडिया स्टूडियो में काम करने की वजह से लगातार मैं सीट पर बैठती रहती है, इससे दर्द और बढ़ने लगा। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि दर्द इतना क्यों बढ़ रहा है, लेकिन मैंने नॉर्मल दवाओं से ही अपना इलाज करना शुरू किया। मैंने कई डॉक्टर दिखाए तो थोड़ा आराम मिला, लेकिन फिर एक दिन अचानक दर्द बहुत ज्यादा हो गया। ऐसा लगा जैसे मैं बस मर ही जाऊंगी अब मुझे अस्पताल में एडमिट करना पड़ा, मेरा इलाज शुरू हुआ। अब तक समझ ही नहीं आ रहा था कि मुझे हुआ क्या है।
मुझे स्पाइनल टीबी था
मुझे स्पाइनल टीबी था, इसके बारे में मैंने कभी सुना ही नहीं था, जब डॉक्टर ने बताया कि ये आसान नहीं होगा, आपको काफी दर्द सहना पड़ेगा। क्योंकि मैं बहुत ही आध्यात्मिक हूं तो मुझे अपने भगवान पर विश्वास था। मैं दिल्ली की रहने वाली थी इसलिए मेरा इलाज यहीं चला, स्पाइन की नर्व के साथ लंग्स की नर्व भी कनेक्टेड होती है, इसलिए मेरे दोनों लंग्स भी इन्फेक्टेड हो गए थे। लेकिन मैं एक पल के लिए भी डरी नहीं, हारी नहीं। पता नहीं कौन सी शक्ति मेरी मदद कर रही थी, मेरा विश्वास ही था जो मेरे साथ 18 महीने तक चला। वरना इस टीबी के साथ एक दिन भी चलना मुश्किल होता है।
ना ही उठ सकती थी और ना ही बैठ सकती थी
पेनकिलर्स, स्टेरॉयड्स और काफी कुछ दिया जाता रहा, दर्द इतना होता था कि ना ही उठ सकती थी और ना ही बैठ सकती थी, इस दर्द को बयां करना बहुत मुश्किल था। जैसे ही पेन किलर्स बंद हुए दर्द का एहसास बढ़ गया। मुझे बेड से उठकर बैठने में 10-15 मिनट लगते थे, ज्यादा चल नहीं पाती थी। पूरी रात दर्द,रोना, चीखें आती थी। एक दिन दर्द इतना बढ़ गया कि एमरजेंसी में ले जाना पड़ा। डॉक्टर ने मुझे दो महीने के लिए बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी। लेकिन मुझे पता था कि मुझे जल्दी से जल्दी ठीक होना है। मैं खूब मेडिटेशन करने लगी और एक महीने के अंदर ही मुझे बहुत हल्का महसूस होने लगा। मेरा दर्द भी कम होने लगा। लगभग चार महीने तक ये इलाज चला और उसके बाद मैं काफी हद तक ठीक हो गई, लेकिन स्पाइन में टीबी अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी।
काफी समय तक दवाएं लेनी पड़ी
ऐसी स्थिति में मैं पहले की तरह अपने काम पर कैसे लौटती। लेकिन मेरा मनोबल इतना शक्तिशाली था कि मैं आगे बढ़ी और मैंने ठान लिया कि ऐसे बैठे रहने से नहीं होगा। स्पाइनल टीबी में वक्त लगता है इसलिए काफी समय तक दवाएं लेनी पड़ी। आज भी मैं पूरी तरह से ठीक नहीं हुई, दवाएं चलती हैं लेकिन मैं हर काम कर पाती हूं, इस दौरान मैंने यही महसूस किया कि आपके शरीर से ज्यादा आपके मन में ताकत होनी चाहिए। अगर आप हिम्मत रखते हैं तो हर कोई आपका साथ देता है। भगवान की शक्तियां आपको महसूस होती हैं। बीमारी के वक्त उससे डरे नहीं, बल्कि हिम्मत से उसका सामना करें, फिर देखें कैसे वो खुद भाग जाएगी। मैंने भगवान को अपने पास पाया, मैं उस दौरान उनसे रोजाना बातें करती थी।
आप पॉजिटिव रहें और मन मजबूत रखें
मैंने यही जाना कि इस बीमारी में दर्द बहुत होता है, जीना मरने जैसा लगता है लेकिन सही दवाएं और इलाज से आप ठीक हो सकते हैं। शर्त है आप पॉजिटिव रहें और मन मजबूत रखें। आज मुझे लगता है मैं उड़ सकती हूं, इस विश्व टीबी दिवस पर मैं बस इस अनुभव के साथ यही बताना चाहती हूं कि कोई बीमारी बड़ी या छोटी नहीं होती, स्पाइनल टीबी बहुत रेयर लेकिन दर्द भरी बीमारी है, फिर भी आप सही समय पर इसका इलाज करें, ध्यान रखें तो ये ठीक हो ही जाएगी। बीमारी से डरें या नफरत मत करें, बल्कि डटकर इसका सामना करें। मेरे परिवार ने मेरा बहुत साथ दिया, कई बार मैं हार गई थी लेकिन इन लोगों ने संभाला और मैं उठकर खड़ी हो गई। आज ये कहना गलत नहीं होगा।

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