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हाई ब्लड शुगर वालों को होता है अंधेपन खतरा, स्टडी में खुलासा

  • हाल ही में हुई रिसर्च की मानें तो हाई ग्लूकोज लेवल के कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा होता है ।
    डायबिटीज एक कॉमन परेशानी है। इस बीमारी में परहेज ना करने पर इससे लोगों को गंभीर परेशानी हो सकती है। द लांसेट में प्रकाशित एक ऑल इंडिया रिसर्च के मुताबिक, देश में डायबिटीज के कारण 40 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 30 लाख लोगों को अंधेपन का खतरा है। इस स्टडी में एर्नाकुलम के रिसर्चर्स भी शामिल हैं।
    बिना लक्षण के बढ़ती है डायबिटिक रेटिनोपैथी…
    रिपोर्ट की मानें तो 13 प्रतिशत भारतीय डायबिटिक रेटिनोपैथी के जोखिम में है। ये एक माइक्रोवैस्कुलर कॉम्पलिकेशन है जो बिना लक्षणों के आगे बढ़ सकती है और डायबिटिक रेटिनोपैथी को खतरे में डाल सकती है। हालांकि, 4 प्रतिशत लोगों में अनुपचारित डायबिटिक रेटिनोपैथी के रिजल्ट अपरिवर्तनीय अंधेपन वीटीडीआर से हुई है। भारत में अंधेपन की दर को कम करने के लिए डायबिटीज वाले लोगों के लिए व्यवस्थित रेटिनल स्क्रीनिंग के निर्णय लेने के लिए डायबिटिक रेटिनोपैथी और वीटीडीआर की व्यापकता के राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय अनुमानों को समझने के लिए ये रिसर्च की गई थी।
    क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी ?
    डायबिटिक रेटिनोपैथी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की रेटिना को प्रभावित करता है। रेटिना, आंख का पर्दा होता है जहां तस्वीर बनती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी में रेटिना को ब्लड पहुंचाने वाली महीन नसों के डैमेज होने के कारण होता है। अगर इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो व्यक्ति अंधा भी हो सकता है।
    इस तरह हुई रिसर्च
    शोधकर्ताओं ने दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच 10 भारतीय राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 40 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में ज्ञात और निदान किए गए डायबिटीज वाले लोगों में एक कॉम्पलेक्स क्लस्टर सैंपलिंग डिजाइन का इस्तेमाल करते हुए डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए एक क्रॉस-सेक्शनल स्क्रीनिंग रिसर्च की गई। इसमें लगभग 42,146 प्रतिभागियों की जांच हुई, जिनमें से 19% को डायबिटीज होने की पहचान की गई। बाकी 78 प्रतिशत में ग्रेडेबल रेटिनल छवियां थीं। अध्ययन से पता चला कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए शहरी और ग्रामीण निवास के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।

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