Home संपादकीय सरदार पटेल के अपमान पर मौन क्यों

सरदार पटेल के अपमान पर मौन क्यों

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हम सब भली प्रकार यह जानते हैं कि कांग्रेस में कभी भी सरदार वल्लभभाई पटेल को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी थे। सरदार पटेल लोकप्रियता, स्वीकार्यता और योग्यता में श्रेष्ठ थे। स्वतंत्रता के पूर्व कांग्रेस जब भारत के पहले प्रधानमंत्री के चयन की दिशा में आगे बढ़ रही थी, तब सरदार पटेल के नाम पर ही निर्विवाद मुहर लगी थी किंतु महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के कारण अवसर दिया गया पंडित जवाहरलाल नेहरू को। स्वतंत्र के बाद भी सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ाने में कांग्रेस ने संकोच ही किया है। इस संकोच का कारण क्या था, यह अध्ययन और गहराई से समझने का विषय है।

हाल ही में जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सरदार पटेल का अपमान करने का प्रयास हुआ, तब किसी शीर्ष नेता ने इस पर आपत्ति नहीं ली। कांग्रेस की सभा से यह बात निकलकर अब सार्वजनिक विमर्श में आ चुकी है, तब भी किसी शीर्ष नेता ने इसका खंडन नहीं किया है। क्या कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इस मौन को तारिक हामिद कारा की बातों का समर्थन माना जाए? जम्मू-कश्मीर के कांग्रेसी नेता तारिक हामिद कारा ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को श्रेष्ठ साबित करके के लिए सरदार पटेल का खुलकर अपमान किया है। कारा का कहना है कि पंडित नेहरू की वजह से जम्मू-कश्मीर आज भारत का अंग है।

जहां तक पटेल का सवाल है तो वो भारत का बंटवारा कर पाकिस्तान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना के खेमे में थे। पटेल तो जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के हाथों सौंपने को तैयार थे। सरदार पटेल के बारे में यह बातें कोई मूर्ख ही कह सकता है। सरदार को जिन्ना का सहयोगी बताना, न केवल एक महान नेता का अपमान है बल्कि यह ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भ्रम का वातावरण बनाना भी है। कांग्रेस के किसी भी नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरदार उस महान नेता का नाम है, जिसके कारण आज भारत हमें एकीकृत रूप में दिखाई देता है। सरदार पटेल ने 556 रियासतों का विलय भारत में कराया। जम्मू-कश्मीर में जो समस्या हमें दिखाई देती है, उसका कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के निहित स्वार्थ एवं अदूरदर्शी दृष्टिकोण था। वास्तविकता तो यह है कि जम्मू-कश्मीर का मामला बिगड़ा ही पंडित नेहरू के हस्तक्षेप के कारण।

जम्मू-कश्मीर के विलय में हो रही देरी को लेकर सरदार तो नाराज भी हुए थे। बाद में जब पंडित नेहरू जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह के मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र गए तब भी उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। बहरहाल, कांग्रेस की सर्वोच्च इकाई में राष्ट्रीय विचार के नेताओं का अपमान होने का यह पहला मामला नहीं है। कांग्रेस के मुस्लिम नेता अकसर राष्ट्रीय विचार के नेताओं का अपमान करते हैं। याद करें, कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद अली ने महात्मा गांधी की लोकप्रियता से चिढ़कर कहा था- ”मैं एक $फाजिर (व्यभिचारी) और $फासिद (दुश्चरित्र) मुसलमानों को भी महात्मा गांधी से अच्छा मानता हूँ।

कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं एवं मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति पर चलने वाले नेताओं ने हमेशा राष्ट्रीय विचार के राजनेताओं को कमतर दिखाने का ही प्रयास किया है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अब भी चाहे तो सामने आकर इस घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण दे सकता है और सरदार पटेल का अपमान करने वाले संकीर्ण सोच के तारिक हामिद कारा को न केवल राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बल्कि कांग्रेस से भी बाहर निकाल सकता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तब इस घटना को संदर्भ मानकर कांग्रेस की नीति एवं दृष्टि पर सदैव प्रश्न उठाए जाएंगे।

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