आतंक पर प्रहार

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अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत ही एकमात्र देश है जो विश्व और मानवता के लिए खतरा बने आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक ढंग से लड़ाई लड़ता दिखता है। विगत दिनों भारत की राजधानी में आतंकवाद के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हुई है। इस संगोष्ठी में भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नए चरण में ढुलमुल रवैये के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जो विचार व्यक्त किए, उनसे भारत की आगे की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ देशों ने आतंकवाद के समर्थन को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बना लिया है और कुछ आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाइयों को रुकवाकर इसे परोक्ष समर्थन देते हैं। 
प्रधानमंत्री मोदी ने किसी देश का नाम भले नहीं लिया हो, लेकिन उनका स्पष्ट इशारा पाकिस्तान और चीन की ओर था। चीन ने पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से एक के बाद एक पाकिस्तानी आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में डाले जाने से बचाया है, वह जगजाहिर है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इतना ही कहकर नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जो भी देश आतंकवाद का समर्थन करते हैं, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़े। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उचित ही रेखांकित किया है कि आतंक से भी कहीं अधिक खतरनाक उसे धन उपलब्ध कराना है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आतंकवाद के आर्थिक स्रोतों को बंद कर दिया जाए, तो उसकी कमर टूट जाएगी।
आतंकवाद के पनपने में सबसे बड़ी भूमिका ऐसी ही व्यवस्थाएं हैं, जो आतंकी समूहों को धन उपलब्ध कराती हैं। आतंकवाद के लिए धन उपलब्ध कराने के आरोप पाकिस्तान पर भी लगते हैं। अब तो यह तथ्य सबके सामने आ चुका है कि पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध आतंकवाद को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रखा है। हमारे देश को अस्थिर करने तथा आतंकियों द्वारा भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने की साजिशें पाकिस्तान में रची जाती रही हैं। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की नापाक हरकतों को चीन का समर्थन भी मिल रहा है। 
आतंकियों को धन देने के मामले को लेकर इस संबंध में बनी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पाकिस्तान पर कार्रवाई भी की है। लेकिन कुछ ताकतवर देश, जिनमें अमेरिका और पश्चिमी देश भी शामिल हैं, अपने भू-राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए पाकिस्तान के साथ नरमी से पेश आते रहे हैं। हाल में आतंकियों को धन देने के मामले में लगे आरोपों पर पाकिस्तान की फर्जी सफाई को स्वीकार करते हुए उसे निगरानी सूची से निकाल दिया गया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान को अमेरिका से सैन्य सहायता के नाम पर खरबों रुपये की वित्तीय सहायता भी दी गयी है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना और उसकी कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई अपनी हरकतों के लिए करेंगे। चीन और अमेरिका के बीच चल रही रस्साकशी भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिणी एशिया की शांति को प्रभावित कर सकती है। उम्मीद है कि आतंकवाद पर लगाम लगाने के संदर्भ में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की चर्चाओं तथा भारत के प्रस्तावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

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