स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान दें राज्य

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कोरोना महामारी की तीसरी आवृत्ति को देखकर राज्य सरकारें स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंधन करने के प्रयास कर रही हैं, ताकि लोगों को परेशानी से बचाया जा सके। परंतु प्रश्न यह है कि स्वास्थ्य प्रबंध पर आपदा के समय में ही हम क्यों जागते हैं? क्या राज्यों को नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन एवं हिसाब-किताब नहीं करना चाहिए? स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने की ओर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि आने वाले समय में इस प्रकार की महामारी और भी आ सकती हैं।

नीति आयोग की चौथी हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि कई राज्यों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत कार्य किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जिन्होंने शीर्ष स्थान बनाया है, वहाँ भी अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में शीर्ष राज्यों में स्थान प्राप्त करने वाली राज्य सरकारें फूलकर कुप्पा न होवें। उनकी स्थिति ‘अंधों में काना राजा की है। कोरोना महामारी ने उनकी स्थिति साफ कर दी है। भले ही केरल प्रथम स्थान पर रहा लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को संभालने में वह उतना सफल नहीं रहा, जितना इस सूची के आखिर में रहने वाले राज्य रहे हैं।

यह भी देखें कि संपूर्ण प्रदर्शन के लिहाज से शीर्ष पर रहने वाला केरल वृद्धिशील प्रदर्शन में 12वें स्थान पर खिसक गया। यानी उसने अपने यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर उतना अच्छा काम नहीं किया। वहीं, संपूर्ण प्रदर्शन में सबसे पीछे रहने वाला उत्तरप्रदेश वृद्धिशील प्रदर्शन में पूरे देश में अव्वल रहा है। इस रिपोर्ट में उत्तरप्रदेश की 43 में से 33 मानकों पर स्थिति पहले की अपेक्षा बेहतर पाई गई है। अर्थात् उत्तरप्रदेश की सरकार ने अपने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने एवं उनकी गुणवत्ता बढ़ाने पर भी आगे रहकर काम किया है। आज किसी भी राज्य के लिए सबसे पहला काम हो गया है कि वह अपने राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।

निश्चित रूप से उत्तरप्रदेश की सरकार इस उपलब्धि का श्रेय लेना चाहेगी। श्रेय लेनेमें कुछ भी गलत नहीं है। यदि सरकार ने जनता के हित में कार्य किया है, अपनी पिछली स्थिति को सुधारते हुए आगे बढऩे का प्रयास किया है, तब उसकी सराहना तो की ही जानी चाहिए। उत्तरप्रदेश की योगी सरकार अपने इन्हीं कार्यों की वजह से अब तक सामने आ रहे सभी चुनावी सर्वेक्षणों में बढ़त बनाए हुए दिखाई दे रही है। बहरहाल, नीति आयोग की स्वास्थ्य से संबंधित इस रिपोर्ट का सार निकाला जाए और समूचे देश के स्वास्थ्य का आकलन किया जाए, तब स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं कही जा सकती। हालाँकि पहले की अपेक्षा पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य को लेकर बहुत बढिय़ा कार्य हुए हैं।

सामान्य नागरिकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने भी केंद्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ की हैं और परिणामकारी कदम उठाए हैं। परंतु, अब भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत काम किए जाने की आवश्यकता है। इस बात की अनुभूति कोरोना महामारी ने अधिक कराई है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार के साथ कदम मिलाते हुए राज्य सरकारें अपने स्तर पर भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में और सुधार करेंगी।

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