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वैक्सीन पर भ्रम फैलाना ठीक नहीं

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कांग्रेस की ओर से अब नया भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है कि भारत बायोटेक द्वारा निर्मित स्वदेशी कोवैक्सिन में गाय के नवजात बछड़े का सीरम उपयोग किया जा रहा है। हम जानते हैं कि भारत में गाय बहुसंख्यक जनता की धार्मिक आस्था का केंद्र है।
एक ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वैक्सीन की कथित कमी पर राजनीति करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके साथी वैक्सीन को लेकर दुष्प्रचार में अभी तक लगे हुए हैं।

कांग्रेस की ओर से अब नया भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है कि भारत बायोटेक द्वारा निर्मित स्वदेशी कोवैक्सिन में गाय के नवजात बछड़े का सीरम उपयोग किया जा रहा है। हम जानते हैं कि भारत में गाय बहुसंख्यक जनता की धार्मिक आस्था का केंद्र है। यदि उसके मन में यह भ्रम पैदा हो गया कि कोरोना वैक्सीन में गाय के बछड़े का सीरम उपयोग किया जा रहा है तो वैक्सीनेशन के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अभी भी देखने में आ रहा है कि पूर्व में फैलाई गई अफवाहों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कोरोना वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं।

कोरोना संबंधी वैक्सीन को लेकर जो भी भ्रम का वातावरण समाज में बना है, उसके लिए कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दल दोषी हैं। हमने देखा कि अनेक नेताओं ने तो यहाँ तक कह दिया था कि यह भाजपा वैक्सीन है। अपने ही देश के वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों की प्रतिभा पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा था कि वैक्सीन जल्दबाजी में बनाई गई है। प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। भारत की वैक्सीन विश्वसनीय नहीं है।

कांग्रेस द्वारा फैलाया गया झूठ अधिक दूर तक जाता, उससे पहले ही भारत बायोटेक और भारत सरकार को स्पष्टीकरण के लिए सामने आना पड़ा। भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को लगाई जा रही कोवैक्सीन में गाय के बछड़े का सीरम नहीं है। इस बात पर किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक आम प्रक्रिया है। वैक्सीन कंपनियां बछड़े के सीरम का इस्तेमाल सेल्स को विकसित करने में करती हैं। उसमें वायरस को दाखिल किया जाता है। बाद में इन वायरस को कमजोर कर वैक्सीन में लिया जाता है। इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि वैक्सीन में बछड़े का सीरम मिलाया जा रहा है। दरअसल, बछड़े के सीरम का काम बहुत सीमित होता है।

वैक्सीन बनाने से पहले सेल्स विकसित होते हैं, जिन्हें वायरस से इंफेक्ट किया जाता है। इन सेल्स को बनाने में बछड़े के सीरम का इस्तेमाल जरूर होता है। जब सेल्स विकसित हो जाते हैं तो उन्हें शुद्ध करते हैं। इस दौरान सेल्स एक रासायनिक प्रक्रिया से गुजरते हैं और इसके बाद उनमें बछड़े के सीरम का अंश रहने की कोई संभावना नहीं रहती। लेकिन, यह सब जानकारी होने के बाद भी कांग्रेस की ओर से दुष्प्रचार किया जा रहा है जबकि यह समय नागरिकों को वैक्सीन के प्रति जागरूक करने और उन्हें टीकाकरण कराने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यक है।

सबको यह बात स्पष्ट तौर पर समझ लेना चाहिए कि हम जितनी जल्दी अधिकतम जनसंख्या का टीकाकरण कर पाएंगे, उतना ही अधिक कोरोना का खतरा हमसे दूर होगा। परंतु, लगता है कि दिग्भ्रमित राजनीति यह सहजता से होने नहीं देगी। पता नहीं क्यों नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि टीकाकरण और कोरोना महामारी राजनीति का विषय नहीं, बल्कि विज्ञान का विषय है। वैक्सीन के संबंध में सब प्रकार की चिंता वैज्ञानिकों को करने दी जाए तो अधिक ठीक रहेगा।

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