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अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

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जून के पहले सप्ताह में निर्यात में 52 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में बेहतरी का संतोषजनक संकेत है। उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष की तुलना में मार्च से मई के बीच निर्यात में बहुत भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब यह है कि जून में भी यह सिलसिला बरकरार रहेगा।

पिछले वर्ष के अनुभवों को देखते हुए महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऐसी आशंकाएं जतायी जा रही थीं कि एक बार फिर हमारी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। लेकिन पिछले वर्ष सितंबर से इस वर्ष फरवरी के बीच हुई बढ़ोतरी से यह भरोसा भी था कि संक्रमण की भयावह छाया से निकलते ही आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से आगे बढ़ेंगी। जून के पहले सप्ताह में निर्यात में 52 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में बेहतरी का संतोषजनक संकेत है।

उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष की तुलना में मार्च से मई के बीच निर्यात में बहुत भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब यह है कि जून में भी यह सिलसिला बरकरार रहेगा। ध्यान रहे, यही वह समय है, जब कोरोना की दूसरी लहर ने देश के बड़े हिस्से, जिसमें औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे, को अस्त-व्यस्त कर दिया था। वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी मांग है। इस मांग की पूर्ति में भागीदारी कर भारत अपनी अर्थव्यवस्था का ठोस आधार दे सकता है।

जून के पहले सप्ताह में आयात में भी लगभग 83 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बढ़त के दो मुख्य निष्कर्ष हैं। एक, घरेलू बाजार में मांग बढ़ रही है। इससे इंगित होता है कि उपभोक्ताओं एवं उद्योगों को विश्वास है कि जल्दी ही अर्थव्यवस्था समुचित गति पकड़ लेगी। दूसरा यह कि कई तरह के निर्यातों के लिए वस्तुएं आयातित की जा रही हैं। इससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आगामी महीनों में भी निर्यात के आंकड़े उत्साहजनक होंगे। आयात और निर्यात का समीकरण आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से सीधे जुड़ा हुआ है।

महामारी के बाद की दुनिया में भारत समेत अनेक देशों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की अपेक्षा है कि वे आपूर्ति शृंखला में अपनी भागीदारी का विस्तार करें। बीते वर्षभर से सरकार की कोशिश है कि उत्पादन क्षमता और आधारभूत संरचना का विस्तार कर न केवल व्यापक घरेलू बाजार की मांग को पूरा किया जाए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जाए।

महामारी से पहले सबसे तेज गति से बढऩेवाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत की क्षमता और महत्वाकांक्षा को देखते हुए कई देश एवं देशों के समूह व्यापारिक समझौते के लिए प्रयासरत हैं। भारत ने भी अनेक पूर्ववर्ती समझौतों की समीक्षा का आग्रह किया है। आयात एवं निर्यात में बढ़त के मौजूदा सिलसिले से इन गतिविधियों को बड़ा आधार मिलेगा। महामारी के बावजूद विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि से भी जाहिर होता है कि अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य एवं व्यापार में भारत की संभावनाओं को लेकर निवेशक आश्वस्त हैं।

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