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महंगाई से राहत के संकेत

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मोदी सरकार के सात वर्ष के कार्यकाल की विशेषता ही यही रही कि एक ओर विकास को गति मिली लेकिन खाने-पीने की वस्तुओं के दाम नहीं बढ़े। आम लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए सरकार ने पहलकदमी की है।

पिछले कुछ दिनों से मध्यमवर्ग पर महंगाई का बोझ बढ़ गया। खाद्य तेल से लेकर दालों तक के दाम में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने रसाई का बजट बिगाड़ दिया था। जबकि मोदी सरकार के सात वर्ष के कार्यकाल की विशेषता ही यही रही कि एक ओर विकास को गति मिली लेकिन खाने-पीने की वस्तुओं के दाम नहीं बढ़े। आम लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए सरकार ने पहलकदमी की है। इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करने की घोषणा की है।

कच्चे पाम ऑयल के आयात पर अभी 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। अब यह केवल 2.5 प्रतिशत होगा। इसी तरह कच्चे सोया और सूरजमुखी के तेल पर लगनेवाले शुल्क को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है। कृषि अधिशुल्क को जोड़कर अभी तक इन तेलों के आयात पर प्रभावी शुल्क 30.25 प्रतिशत है, जो अब कम होकर 24.75 प्रतिशत रह जाएगा। खाद्य मंत्रालय का आकलन है कि इस कटौती से तेलों की खुदरा कीमत में प्रति लीटर चार से पांच रुपये की कमी होगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि तेल उत्पादक जल्दी ही इसका लाभ ग्राहकों को देंगे। सरसों की आवक में कमी खाद्य तेलों के दाम में उछाल की मुख्य वजह रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतें घटने लगी हैं। ऐसे में जल्दी ही भारतीय बाजार में सुधार की आशा है। शुल्क घटाने से आयातकों का बोझ कम होगा और वे अधिक आयात कर सकेंगे। उससे भी सरसों की कमी का दबाव कम होगा। उल्लेखनीय है कि खाद्य तेल और दालों की महंगाई का योगदान मुद्रास्फीति बढ़ाने में सबसे अधिक होता है। एक वर्ष पहले की तुलना में खाद्य तेलों की कीमत में लगभग 60 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। आयात में कुछ गिरावट और घरेलू आपूर्ति में कमी से उत्पन्न स्थिति की बेहतरी के लिए सरकार करों और शुल्कों को कम करने पर विचार कर रही है तथा इस संबंध में राज्य सरकारों से बातचीत की योजना है। आयात शुल्क में कमी इसी प्रयास का हिस्सा है। एक उम्मीद फसलों के बाजार में आने से भी है।

सरकार का आकलन है कि तब मुद्रास्फीति चार से छह प्रतिशत के दायरे में आ जाएगी। रिजर्व बैंक ने भी अपने अनुमान में बताया है कि फसलों की आवक से मुद्रास्फीति घटेगी। महंगाई बढऩे के कारण लोगों की बचत पर भी असर पड़ा है, जो पहले से ही कोरोना महामारी से पैदा हुई स्थितियों तथा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के महंगे होने से चिंताजनक स्थिति में है। खाद्य पदार्थों की महंगाई सबसे अधिक गरीब और निम्न आय वर्गीय परिवारों को प्रभावित करती है, जो अपनी कमाई का अधिकांश भोजन पर खर्च करते हैं। 2014के बाद से ही सरकार के कामकाज का आकलन करें तो ध्यान आता है कि सरकार ने मध्यम और निम्म आयवर्ग की चिंता प्राथमिकता के साथ की है। इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही उसे महंगाई से राहत मिलेगी।

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