लक्ष्य पर दृष्टि

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वर्ष 2024 में लोकसभा के चुनाव और निकट भविष्य में 9 राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तैयारी शुरू हो चुकी हैं। राजधानी दिल्ली में सम्पन्न हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक से इसके संकेत स्पष्ट तौर पर मिलते हैं। अखिल भारतीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्‌डा का कार्यकाल आम चुनाव तक बढ़ा दिया गया है। उनके नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा, विधानसभा और उपचुनाव सहित 120 से ज्यादा चुनाव लड़े हैं, जिसमें उसे 73 पर जीत हासिल हुई है। किसी भी अध्यक्ष के लिए यह एक शानदार उपलब्धि है। परंतु श्री नड्डा का कार्यकाल बढ़ाने के निर्णय के पीछे केवल यह उपलब्धि नहीं है बल्कि भाजपा आम चुनाव से पहले किसी प्रकार की जमावट को बदलना नहीं चाहती है। विजयी समीकरणों को बनाए रखकर ही भाजपा चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। पार्टी अध्यक्ष श्री नड्डा ने भी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उनके सामने लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें सभी चुनाव जीतने हैं। आम चुनाव-2024 से पहले नौ राज्यों में से एक भी राज्य हारना नहीं है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिस प्रकार का जोश, उत्साह और आत्मविश्वास दिखाई दिया, वह स्वाभाविक ही है। गौर करने की बात यह है कि उनका यह आह्वान सिर्फ शाब्दिक नहीं है। संगठन को मजबूती देने का मोर्चा ऐसा है, जिस पर भाजपा ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाया है। इस बार भी पार्टी अध्यक्ष की यह घोषणा मायने रखती है कि भाजपा ने 72,000 कमजोर पाए गए बूथों को मजबूत बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए लक्ष्य से आगे बढ़कर 1.30 लाख बूथों तक पहुंच बना ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कार्यकारिणी से पार्टी कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को कुछ संदेश दिया है। जिनमें प्रमुख है कि अब चुनाव में केवल 400 दिन शेष हैं। कार्यकर्ताओं को प्रत्येक दिन का सदुपयोग करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने लक्ष्य दिया है कि हमें इन 400 वर्षों में प्रत्येक क्षेत्र में, प्रत्येक संप्रदाय एवं प्रत्येक व्यक्ति से संपर्क करना है। कोई भी व्यक्ति छूटना नहीं चाहिए। भाजपा की विचारधारा की विशालता को प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही कुछ लोग भाजपा को वोट नहीं देते होंगे, तब भी हमें उनसे संपर्क और संवाद करना है। याद रखें कि यह मुसलमानों और ईसाइयों का विश्वास जीतने भर की कवायद नहीं है। यह तो प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का संकल्प ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। बहरहाल, भारतीय जनता पार्टी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक एवं छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में उसका मुकाबला सीधे कांग्रेस से है। तथाकथित भारत जोड़ो यात्रा से कांग्रेस कितनी मजबूत हुई होगी, यह तो आनेवाले समय में पता चल ही जाएगा। परंतु हमें नहीं भूलना चाहिए कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस कमजोर होने के बाद भी भाजपा की लचर तैयारी के कारण सत्ता में आई थी। वहीं, छत्तीसगढ़ में अत्यधिक आत्मविश्वास भाजपा को ले डूबा था। भाजपा को दोनों ही मोर्चों पर काम करना होगा। कार्यकर्ताओं में जीत का आत्मविश्वास तो जगाना होगा लेकिर मेहनत के लिए भी तैयार करना होगा। ऐसा न हो कि अत्यधिक आत्मविश्वास के चक्कर में धरातल पर कमी रह जाए। संगठनात्मक जमावट भी सावधानीपूर्वक करनी होगी। नौ राज्यों में से विशेषकर चार-पाँच बड़े राज्यों में चुनाव तैयारी एवं उसके परिणाम आम चुनाव तक प्रभाव छोड़ेंगे।

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