रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

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आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयास आवश्यक है। भारत सरकार ने पिछले कुछ समय से सैन्य उपकरण एवं हथियार निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं, जिनके परिणाम भी अब दिखाई देने लगे हैं। सैन्य उपकरण बनानेवाली शीर्ष 100 कंपनियों में भारत की तीन कंपनियां अपनी जगह बनाने में सफल रही हैं।

स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (42वें स्थान पर) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (66वें स्थान पर) हथियारों की बिक्री में क्रमश: 1.5 प्रतिशत और चार प्रतिशत की वृद्धि करने में सफल रही हैं। इसके साथ ही भारतीय आयुध कारखानों (60वें स्थान पर) के हथियारों की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में भारतीय कंपनियों की हथियारों की बिक्री 48 हजार 750 करोड़ रुपये रही, जो बीते वर्ष की तुलना में 1.2 प्रतिशत से अधिक है, जबकि शीर्ष 100 कंपनियों की कुल बिक्री का यह 1.2 प्रतिशत है।

हथियार निर्माण के क्षेत्र में भारत को अभी ओर लंबी छलांग लगानी है। भारत अभी सैन्य उपकरणों एवं हथियारों की पूर्ति के लिए बहुत हद तक विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। यह निर्भरता कम करके ही आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा जा सकता है। सैन्य उपकरण एवं हथियार निर्माण के क्षेत्र में अभी अमेरिका का दबदबा है। चीन और रूस की हिस्सेदारी भी बड़ी है। भारत इस क्षेत्र में इसलिए पिछड़ा बना रहा क्योंकि हमारी पूर्ववर्ती सरकारों में यह आत्मविश्वास पैदा ही नहीं हुआ कि हम वैश्विक स्तर के सैन्य उपकरण एवं हथियार बना सकते हैं।

इसलिए हम अब तक स्थानीय स्तर पर तकनीकी दक्षता विकसित करने की बजाय हथियारों को आयात करने में लगे रहे, जिससे सैन्य उपकरणों के मामले में कभी आत्मनिर्भर ही नहीं हुए। लेकिन नये भारत के निर्माण का संकल्प लेकर चल रही मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सपना देखा और उसके लिए नीति बनाई। इस क्षेत्र में शोध, प्रोत्साहन एवं विकास को बढ़ावा दिया। उम्मीद है कि जल्द ही सैन्य उपकरण एवं हथियारों के निर्माण में भारत एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरकर सामने आएगा।

भारत जैसे संप्रभु राष्ट्र में रक्षा हथियारों और साजो-सामान के निर्माण पर जोर देना एक अत्यंत आवश्यक कदम है। अच्छी बात यह है कि वर्तमान केंद्र सरकार की प्राथमिकता में यह काम है। बड़ी शक्ति बनने की आकांक्षा रखनेवाला कोई भी देश हो, उसे अर्थव्यवस्था और रक्षा के क्षेत्र में, जहां तक संभव हो, आत्मनिर्भर बनने के प्रयास करने ही चाहिए।

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