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केरल में भाजपा के लिए संभावनाएं

भारतीय जनता पार्टी की उपस्थिति तो भारत के दक्षिणी हिस्से के लगभग सभी राज्यों में हो गई है लेकिन अब भी कर्नाटक के अलावा उसे सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत का जनादेश अन्य किसी राज्य में नहीं मिला है। हालांकि उसके साथ व्यापक जनसमर्थन अवश्य दिखायी देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दो दिवसीय केरल यात्रा में जिस तरह का जनसैलाब स्वागत के लिए उमड़ा, वह इस बात का साक्षी है कि यहाँ भाजपा के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। देर सबेरे केरल में भी कमल खिलकर ही रहेगा। दरअसल, केरल की जनता कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों से मुक्ति चाहती है लेकिन कम्युनिज्म की हिंसक राजनीतिक शैली के कारण लोग खुलकर भाजपा का झंडा नहीं उठा पा रहे हैं। लेकिन किसी को बाहुबल के जोर पर कब तक दबाया जा सकता है? पश्चिम बंगाल से लेकर त्रिपुरा तक के उदाहरण हमारे सामने हैं कि एकछत्र राज्य करनेवाली कम्युनिस्ट सरकारें अपने ही कर्मों के बोझ से दब गई। बहरहाल, केरल के कोच्चि और तिरुवनंपुरम में प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो के दौरान उनका अभिवादन करने के लिए जिस तरह भीड़ उमड़ी वह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं बल्कि जनता की स्वतः स्फूर्त प्रतिक्रिया थी जो अपने उस प्रधानमंत्री को देखने और उनका स्वागत करने उमड़ी थी। केरल में महिलाएं यदि आरती की थाली लेकर प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए खड़ी थीं तो यह दर्शाता है कि विपक्ष दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता पर भले कितने आरोप लगाये लेकिन जनता जानती है कि लोकतंत्र का रखवाला और जनता की सुध लेने वाला नेता कौन है? केरल की जनता ने भले भाजपा की झोली वोटों से नहीं भरी लेकिन प्रधानमंत्री ने इस राज्य के प्रति अपने प्यार में जरा भी कमी नहीं होने दी। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘सबका साथ-सबका विकास’ की अवधारणा को लगातार पुष्ट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने केरल को राज्य की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस, केरल सेंट्रल स्टेडियम से कोच्चि वाटर मेट्रो सेवा सहित कई अन्य विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत की। उल्लेखनीय है कि कोच्चि शहर के साथ निर्बाध संपर्क के लिए बैटरी चालित इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नौकाओं के माध्यम से कोच्चि के आसपास के 10 द्वीपों को जोड़ने वाली यह अपनी तरह की अनूठी परियोजना है। प्रधानमंत्री ने यहां 3200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास किया। भारतीय संस्कृति की विविधताओं के प्रति मोदी के मन में गहरा सम्मान है इसीलिए जब वह किसी राज्य की यात्रा पर जाते हैं तो वहां की संस्कृति और लोकाचार में रंग जाते हैं। केरल दौरे के दौरान भी प्रधानमंत्री पारम्परिक वेशभूषा में दिखे जिसे हर किसी ने सराहा। दरअसल, प्रधानमंत्री संदेश देने का प्रयास करते हैं कि हम सब एक ही हैं। हमें एक दूसरे की वेशभूषा, खानपान और जीवनशैली का सम्मान करना चाहिए। आज जबकि कुछ राजनीतिक एवं बाह्य ताकतें विभिन्न समुदायों में भेद उत्पन्न करने के प्रयत्न कर रही हैं, तब प्रधानमंत्री मोदी का इस तरह ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संदेश देकर उनके अरमानों पर पानी फेर देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रैली के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि केरल में बड़ी संख्या में भाजपा को पसंद करनेवाले बंधु रहते हैं। यही इन्हें एकजुट किया जाए और संवाद बढ़ाया जाए तो केरल में भी वह चमत्कार हो सकता है, जो अन्य राज्यों में हुआ है।

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