Home संपादकीय प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता

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दूसरी लहर भी इसी तरह की लापरवाही का परिणाम थी। हम स्वयं ही संकट को आमंत्रित करते हैं और उसके बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारों पर दोषारोपण करते हैं। सरकारें कितना ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का प्रबंध कर ले लेकिन महामारी के समय में वह सब अपर्याप्त महसूस होता है।

विशेषज्ञों द्वारा कोरोना संक्रमण की तीसरी पुनरावृत्ति के लिए पूवर्मानुमानित समय अब अधिक दूर नहीं है। इस बीच बाजारों से लेकर पर्यटन स्थलों पर जिस प्रकार की लापरवाह भीड़ दिखाई दे रही है, वह भयाक्रांत करनी वाली है। कोरोना महामारी का कठिनतम समय देखने के बाद भी हम बचाव के आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करना नहीं सीखे हैं, यह बहुत ही गंभीर बात है। हमें अपने आचरण का मूल्यांकन करना चाहिए। दूसरी लहर भी इसी तरह की लापरवाही का परिणाम थी।

हम स्वयं ही संकट को आमंत्रित करते हैं और उसके बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारों पर दोषारोपण करते हैं। सरकारें कितना ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का प्रबंध कर ले लेकिन महामारी के समय में वह सब अपर्याप्त महसूस होता है। इसलिए सरकारों के साथ नागरिक सत्ता को भी कोरोना महामारी जैसे संकट से बचने के प्रबंध पर ध्यान देना होगा। यह सही बात है कि पिछले लगभग सवा साल में कोरोना संक्रमण ने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए हमें मजबूर भी किया है। मोदी सरकार एवं राज्य सरकारों ने इस दिशा में आवश्यक पहलकदमी भी शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में साधन-संसाधन की कमी के साथ ही सबसे बड़ी कमी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों का भारी अभाव है। पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हों, तब ही साधन-संसाधनों का समुचित उपयोग किया जा सकता है। प्रशिक्षत स्वास्थ्यकर्मी हों, तो एक बार को साधन-संसाधन की कमी भी छोटी दिखाई देती है। दूसरी लहर के दौरान जब महामारी अपने चरम पर थी, तब अनेक राज्यों से शिकायतें आयी थीं कि वेंटीलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और अन्य कुछ उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है क्योंकि उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित लोग नहीं थे। कम चिकित्साकर्मियों के साथ अधिक मरीजों का उपचार करने की चुनौती भी थी। ऐसे में सभी मरीजों का पूरा ध्यान रख पाना बहुत मुश्किल था।

अच्छी बात यह है कि मोदी सरकार ने इस समस्या को गंभीर चुनौती माना है और इसके प्रभावी समाधान के लिए एक लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की सराहनीय योजना बनायी है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत पहले से अनुभवी चिकित्साकर्मियों के कौशल विकास को बढ़ाने के प्रयास भी होंगे। देश के 28 राज्यों के 194 जिलों में स्थित 300 कौशल केंद्रों को इस योजना के लिए चिह्नित किया गया है।

प्रशिक्षण की इस योजना से स्थानीय स्तर पर लोग छोटी अवधि के पाठ्यक्रमों से जीवन रक्षा, आपात स्थिति में मदद, घरों में रोगियों की देखभाल तथा चिकित्सा उपकरणों को चलाने आदि के बारे में सीख सकेंगे। केंद्र सरकार की इस योजना से न केवल कोरोना संक्रमण की तीसरी पुनरावृत्ति का सामना करना संभव होगा, बल्कि बड़ी संख्या में नये लोगों को काम का अवसर भी प्राप्त होगा और भविष्य में इस प्रकार की किसी भी आपदा के लिए हमारी तैयारी भी मजबूत होगी।

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