मध्यप्रदेश से विश्व को संदेश

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विश्व के प्रमुख संगठन जी-20 की अध्यक्षता का अवसर भारत को मिलने के कारण मध्यप्रदेश को भी 22 देशों के 94 प्रतिनिधियों का स्वागत करने और उनके साथ अपने देश का विचार भेजने का अवसर मिला। मनुष्य का जीवन कैसा होना चाहिए, हमारे विकास की दिशा कैसी होनी चाहिए और किस प्रकार वसुधैव कुटुम्बकम के विचार को जिया जा सकता है, यह संदेश मध्यप्रदेश ने दुनिया को देने का प्रयास किया है। दरअसल, दुनियाभर से ये प्रतिनिधि वैचारिक मंथन ‘थिंक-20’ में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी में एकत्र आए थे। यहाँ जो भी चर्चा हुई, वह जी-20 के माध्यम से शेष दुनिया तक पहुँचेगी ही, परंतु वैचारिक मंथन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण संदेश देने का काम किया। उनका यह भाषण वर्तमान संदर्भों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस समय समूची दुनिया विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बैठाने की चुनौती से जूझ रही हो, कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे ज्वलंत हों, तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के सामने भारत का विचार रखा। ऐसा विचार जिसमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना केंद्रिय है। उन्होंने ठीक ही कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए दुनिया को एक होना चाहिए। पशु-पक्षियों, नदियों-तालाबों, पहाड़ों एवं पेड़ों सहित सबका होना, हमारे लिए आवश्यक है। अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी माना कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत बाकी देशों के मुकाबले बहुत आगे है। कार्बन उत्सर्जन में दुनिया के कई देशों के सामने भारत एक उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लिया है और उस दिशा में ठोस पहल भी प्रारंभ की हैं। अक्षय ऊर्जा के उपयोग की संरचनाएं खड़ी करके विकसित देशों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। मध्यप्रदेश के ही रीवा में सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है। भारत के प्राचीन इतिहास को देखें, तब ध्यान में आता है कि हम उस समय की दुनिया में भौतिक विकास की दृष्टि से भी अग्रणी राष्ट्र थे परंतु हमारा विकास प्रकृति को नष्ट करने की कीमत पर नहीं था। हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर ही आगे बढ़े। पीढ़ी दर पीढ़ी यह संस्कार हस्तांतरित होता रहा है। शिवाजी महाराज जब जलपोतों का निर्माण कर रहे थे तब उन्होंने अपने सैनिकों एवं निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों को आज्ञा दी कि “स्वराज के जंगलों में आम एवं कटहल के पेड़ हैं, जो जलपोत निर्माण के काम आ सकते हैं, परंतु उन्हें हाथ न लगाया जाए, क्योंकि ये ऐसे पेड़ नहीं हैं जो साल-दो साल में बड़े हो जाएं। जनता ने उन पेड़ों को लगाकर अपने बच्चों की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया है”। ऋषियों का दिया विचार हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक श्रीशिव छत्रपति तक परंपरा से आता है। यह कहने में कोई संकोच नहीं कि यही विचार वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन में दिखाई देता है। आज विश्व पटल पर भारत अपने सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक मूल्यों के साथ बढ़ रहा है। इसलिए एक बार फिर दुनिया ने भारत की ओर आशा के साथ देखना प्रारंभ किया है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के देशों के संगठन जी-20 की अध्यक्षता भले ही चक्रीय क्रम की व्यवस्था के कारण भारत के पास आई है, लेकिन यह इसलिए महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, क्योंकि आज भारत अपने जीवनमूल्यों के साथ खड़ा है, जो दुनिया को जीने की राह दिखा सकता है। बहरहाल, 22 देशों के प्रतिनिधियों ने जिस प्रकार की प्रतिक्रियाएं दी हैं, उससे प्रतीत होता है कि मध्यप्रदेश भारत के विचार को आगे बढ़ाने में सफल रहा है। एक बड़ा अवसर-बड़ी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश को मिला, जिसे प्रदेश सरकार ने भली प्रकार से निभाया।

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