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मंत्रिमंडल से संदेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। स्वयं को राजनीति का विश्लेषक बताने वाले विद्वान और अंदरखाने की खबर रखने का दावा करने वाले पत्रकार, सभी चकित रह गए। उनके सभी कयास सिर्फ कयास ही रह गए।

मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। स्वयं को राजनीति का विश्लेषक बताने वाले विद्वान और अंदरखाने की खबर रखने का दावा करने वाले पत्रकार, सभी चकित रह गए। उनके सभी कयास सिर्फ कयास ही रह गए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में न केवल नये लोगों को अवसर दिया है, बल्कि अनेक ऐसे नेताओं को बाहर भी किया, जो अपेक्षित कार्य नहीं कर सके। इसलिए मंत्रिमंडल में जो बदलाव दिखाई दिया उसे यह कहकर कमतर नहीं आंकना चाहिए कि मोदीजी चकित करते हैं इसलिए उन्होंने यह परिवर्तन किए हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी अपनी मंत्रिपरिषद से काम की अपेक्षा करते हैं। उनके लिए कार्य प्राथमिक है। पूर्व में जिन बड़े नेताओं को उन्होंने जिम्मेदारी दी और वे प्रदर्शन नहीं कर पाए तो उनसे मंत्रालय वापस लेने में उन्होंने कोई संकोच नहीं किया। यह एक जिम्मेदार प्रधानमंत्री की पहचान है।

मंत्री का पदभार केवल शोभा का विषय नहीं है। मंत्री पद के साथ बहुत बड़ा दायित्व जुड़ा होता है। यह पद मिलने पर नेताओं को अत्यधिक सक्रियता के साथ कार्य करना चाहिए। सरकार के वांछित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए यथासंभव परिश्रम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिमंडल में शामिल नये मंत्रियों को यह समझाइश भी दी है कि सभी अपने दायित्व को समझें और लक्ष्य की अनदेखी न करें। कोरोना महामारी के कारण एक ओर सरकार के सामने अनेक नयी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, तो वहीं दूसरी ओर सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। दूसरे कार्यकाल के लगभग दो वर्ष कोरोना संकट का सामना करने में ही बीत गए हैं। अब मोदी सरकार के पास लगभग तीन वर्ष का कार्यकाल शेष है।

केवल तीन वर्ष में ही सरकार को अधिकतम कार्य करके दिखाना है। उसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी ने इतना बड़ा बदलाव मंत्रिमंडल में किया है। अब उनका मंत्रिमंडल अधिक युवा और अनुभवी दिखाई दे रहा है। जिस तरह से मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ है, उसे मंत्रिमंडल का विस्तार कहने की अपेक्षा, नये मंत्रिमंडल का गठन करना अधिक उचित होगा। प्रधानमंत्री मोदी का मंत्रिमंडल अखिल भारतीय स्वरूप लिए हुए है। अपने नये मंत्रिमंडल के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार काम करने में अधिक भरोसा करती है।

इसके साथ ही भाजपा ही वह राजनीतिक दल है जो वास्तव में अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ ही भारतीय भाषाओं के नेताओं को भी अवसर दिया गया है। लोकहित के लिए प्रतिबद्ध संतुलित मंत्रिमंडल कैसा होना चाहिए, मोदीजी का नया मंत्रिमंडल उसी का एक आदर्श प्रतिदर्श है।

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