घृणा और नफरत से कैसे जोड़ेंगे भारत

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कांग्रेस का दृष्टिकोण कितने निचले स्तर पर पहुँच गया है, इसका एक उदाहरण बीते दिन देखने को मिला जब कांग्रेस ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरानी गणवेश का जलता हुआ पोस्टर अपने अधिकृत ट्विटर हैंडल से साझा किया। एक सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्त संगठन के प्रति कांग्रेस की यह घृणा और नफरत समझ से परे है। इस पोस्टर के सामने आने के बाद से सामान्य लोग भी अब यह प्रश्न उठा रहे हैं कि इतनी घृणा एवं नफरत के साथ कांग्रेस कैसे भारत जोड़ेगी? यह मानसिकता देश को जलाने वाली है? कांग्रेस की यह मानसिकता देश में नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे सकती है। स्मरण रहे कि कांग्रेस की ओर से हिंसक विचार से प्रेरित यह पोस्टर तब पोस्ट किया गया है, जब राहुल गांधी की तथाकथित भारत जोड़ो यात्रा केरल में है। केरल वह राज्य है, जो पश्चिम बंगाल की तरह कम्युनिस्ट हिंसा की प्रयोगशाला बना हुआ है। पश्चिम बंगाल की तरह केरल भी राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात है। कम्युनिष्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केरल में बड़ी संख्या पर संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं सहित राष्ट्रीय विचार के अनेक लोगों की हत्या की है। वहाँ संघ की गणवेश में आग लगाने का संदेश देकर आखिर कांग्रेस कौन-सा खेल खेलना चाहती है? राहुल गांधी की भारत जोड़ा यात्रा पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहले दिन से सवाल उठाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह भारत जोड़ो नहीं अपितु ‘भारत तोड़ो’ यात्रा है। कांग्रेस और उसके नेताओं का आचरण इस आरोप को सत्य सिद्ध करता प्रतीत हो रहा है। एक प्रश्न के उत्तर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने ठीक ही कहा कि भारत जोड़ने निकले हैं यह अच्छी बात है लेकिन भारत को कैसे जोड़ेंगे, नफरत से? उन्होंने कांग्रेस को ठीक ही आईना दिखाया- “वह लंबे समय से हमारे प्रति घृणा रखते हैं। उनके पिता और दादा ने भी आरएसएस को रोकने की बहुत कोशिश की, संघ पर अकारण दो बार प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन आरएसएस रुका नहीं और बढ़ता रहा, क्योंकि संघ को समाज का समर्थन मिलता रहा है”। प्रारंभ में पंडित नेहरू के भी संघ के प्रति दुराग्रह थे लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध में संघ की भूमिका और अपने मित्रों कम्युनिस्टों की धोखेबाजी से उनकी आँखें खुल गईं। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने गणतंत्र दिवस की परेड में संघ के स्वयंसेवकों को उसी गणवेश में आमंत्रित किया, जिसे आज मतिभ्रम का शिकार कांग्रेस आग लगा रही है। संघ के प्रति कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी सम्मान का भाव रखती थीं। परंतु यह बात अपरिपक्व राजनैतिक नेतृत्व झेल रही आज की कांग्रेस को समझ नहीं आएगा। इस नफरत भरे ट्वीट के बाद न केवल भाजपा ने बल्कि सामान्य लोगों ने भी कांग्रेस को याद दिलाया कि आगजनी से कांग्रेस का गहरा नाता है। कांग्रेस को याद दिलाया जा रहा है कि कैसे उसके नेताओं ने 1948 में चितपावन ब्राह्मणों को चिह्नित करके उनके घर, दुकान, प्रतिष्ठान एवं लोगों को जलाया। उन पर हमले किए। इसी तरह 1984 का सिख विरोधी दंगा भी याद दिलाया जा रहा है, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं के इशारे पर सिखों के गले में जलते टायर डालकर उनकी हत्याएं की गईं। कांग्रेस और राहुल गांधी सहित उसके शीर्ष नेताओं को समझ लेना चाहिए कि नफरत के बदले कुछ हासिल नहीं होगा। इस तरह की राजनीति से कांग्रेस का ही कुरूप चेहरा उघड़कर समाज के सामने आ जाता है। इतनी आलोचना के बाद भी कांग्रेस ने अपनी गलती नहीं स्वीकारी और न ही खेद प्रकट किया। ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय विचार के संगठनों के प्रति नफरत की आग में कांग्रेस भस्म होने को आतुर है।

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