गुजरात चुनाव की रणभेरी

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बहुप्रतीक्षित गुजरात विधानसभा के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा निर्वाचन आयोग ने कर दी है। बहुप्रतीक्षित इसलिए क्योंकि हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही गुजरात के चुनाव की भी घोषणा होनी थी लेकिन किन्ही कारणों से निर्वाचन आयोग ने उस समय यह घोषणा नहीं की। तब निर्वाचन आयोग पर हमेशा की तरह गैर-जरूरी आक्षेप भी लगाए गए। उन सभी आक्षेपों का जवाब निर्वाचन आयोग ने ठीक जवाब दे दिया है। बहरहाल, गुजरात की 182 सीटों पर दो चरणों में 1 और 5 दिसंबर को मतदान होगा। परिणाम हिमाचल प्रदेश के साथ 8 दिसंबर को आएंगे। इस बार गुजरात के चुनाव बहुत रोचक होनेवाले हैं क्योंकि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की निष्क्रियता के कारण आम आदमी पार्टी थोड़ी चमकती दिख रही है। रैलियों और मीडिया में आम आदमी पार्टी की उपस्थिति चौकाने वाली है। हालांकि अभी तक आए चुनाव पूर्व सर्वेक्षण बताते हैं कि गुजरात में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहेगा। गुजरात की जनता एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी को जनादेश देने का मूड बना चुकी है। आश्चर्य की बात तो यह है कि पिछले चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती देनेवाली कांग्रेस इस बार सुस्त क्यों है? कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की निष्क्रियता से प्रतीत होता है कि कांग्रेस भीतरखाने गुजरात में अपनी पराजय पहले ही स्वीकार कर चुकी है। या फिर कांग्रेस भीतर ही भीतर शांतिपूर्वक अपनी तैयारी कर रही है। भले ही भाजपा की जीत सुनिश्चित दिखाई दे रही है लेकिन भाजपा का नेतृत्व बेपरवाह नहीं है। वह इस चुनाव को गंभीरता से ले रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृह राज्य होने के कारण से गुजरात के विधानसभा चुनाव का विशेष महत्व है। यह भाजपा के साथ ही सभी राजनीतिक दल समझते हैं। इसलिए कांग्रेस और आआपा अपनी समूची ताकत इस चुनाव में लगाएंगी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भले ही गुजरात से दूरी बना रखी है लेकिन पार्टी का स्थानीय नेतृत्व एवं कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी खासी मेहनत कर रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्रों में ही भाजपा को करारी पटखनी दी थी। प्रदेश में विधानसभा की 182 सीटें हैं। इनमें 55 सीटें सिर्फ चार बड़े शहरों में हैं। इनमें अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा शामिल हैं, जबकि 127 सीटें कस्बाई एवं ग्रामीण सीटें हैं। इसमें भी बंटवारा करें तो करीब 100 से अधिक सीटें ग्रामीण हैं। कांग्रेस इन्हीं सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। यहाँ ध्यान रखें कि इस चुनाव में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है। आम आदमी पार्टी की चुनौती से भी पार पाना है और भाजपा के सामने अपने पिछले प्रदर्शन से आगे बढ़ना है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि है वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी हैं। यह प्रश्न भी उठ सकता है कि देशभर में तथाकथित भारत जोड़ो यात्रा निकालने वाले राहुल गांधी गुजरात क्यों नहीं आए? यह प्रश्न इसलिए भी मौजूं है क्योंकि कांग्रेस के बहुत से नेता प्रधानमंत्री मोदी से अंधविरोध के कारण गुजरात और गुजराती को हेय दृष्टि से देखते हैं। यही बात दिल्ली के मुख्यमंत्री और आआपा के सर्वेसर्वा अरविन्द केजरीवाल पर लागू होती है। उनके भाषण का तो एक वीडियो ही काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वे गुजरातियों के प्रति ओछी टिप्पणी कर रहे हैं। कांग्रेस और आआपा को अपनी इस छवि से भी बाहर निकलना पड़ेगा। बहरहाल, अब जबकि चुनावी रणभेरी बज चुकी है, तब सभी राजनीतिक दल चुनावी मैदान में अपने राजनैतिक कौशल का प्रदर्शन करेंगे ही, देखते हैं कि जनता किसके वायदों एवं कामकाज पर भरोसा करती है।

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