जनजातीय गौरव को बढ़ाती सरकार

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जनजातीय नायक बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में स्थापित करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा सरकारों ने राष्ट्रीय महत्व का कार्य किया है। इस एक प्रयास से न केवल जनजातीय समुदाय का सम्मान हुआ है अपितु शेष समाज भारत की जनजातीय परंपरा से परिचित भी हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अकसर बिरसा मुंडा के साथ ही अन्य जनजातीय नायकों का उल्लेख करते रहते हैं। अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी उन्होंने धरती आबा कहे जाने वाले इस नायक का जिक्र किया है। उसी क्रम में जब पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर प्रदेश स्तर जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया, तब प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। जनजातीय गौरव दिवस के संदर्भ में जनजातीय परंपरा का जो दर्शन समाज के सामने आया है, उससे जनजातीय समुदाय को लेकर भ्रम फैलानेवाली ताकतें भी हताश हुई हैं। जैसे सूर्य के चमकने से अंधकार दूर भाग जाता है, ठीक वैसे ही सच के प्रकाश से झूठे षड्यंत्र बिखर जाते हैं। याद रखें कि भले ही राजनीतिक विपक्षी दल एवं उनके सहयोगी बुद्धिजीवी भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हों कि भाजपा जनजाति विरोधी है लेकिन भाजपा सरकारों के द्वारा किए गए कार्य साबित करते हैं कि भाजपा ने सही मायनों में जनजातीय समुदाय एवं परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम किए हैं। वास्तविकता तो यह है कि ज्यादातर विपक्षी दलों ने जनजातीय समुदाय के संदर्भ में उन्हीं बातों को दोहराया है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं ईसाई मिशनरीज दोहराते रहते हैं। यानी एक तरह से उन्होंने जनजातीय समुदाय के हित की बात करने की जगह भारत विरोधी ताकतों के विमर्श को आगे बढ़ाने का काम किया। जैसे कि मध्यप्रदेश में ही कांग्रेस के शासनकाल में जनजातीय समुदाय को हिन्दुओं से अलग बताने के प्रयास हुए। ईसाई मिशनरीज खुलकर जनजातीय बंधुओं का कन्वर्जन करती थीं। भाजपा सरकार ने कन्वर्जन को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए हैं। हालांकि अब भी कन्वर्जन का खेल बंद नहीं हुआ है। उल्लेख करना आवश्यक है कि ईसाई मिशनरीज ने बचपन में बिरसा मुंडा का कन्वर्जन कर लिया था परंतु जैसे ही बिरसा मुंडा को मिशनरीज की साजिशें ध्यान आईं तो उन्होंने पुन: हिन्दू धर्म में वापसी की और अपने समुदाय के अन्य लोगों को भी जागरूक किया। समाज बंधुओं को जागरूक करने के लिए वे हमेशा गीता, रामायण और महाभारत पढ़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते थे। बहरहाल, मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस पर कई सौगातें जनजाति बंधुओं को दी। पेसा कानून की लंबित माँग को भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरा किया। यह कानून जल, जंगल, भूमि और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। यह भी संयोग रहा कि देश की पहली अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में जनजाति समुदाय के अधिकारों का संरक्षण एवं संवर्धन करनेवाले इस कानून को लागू किया गया। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक और केन्द्र से लेकर भाजपा शासित राज्य सरकारों ने सदैव ही वंचित वर्गों को सामर्थ्यवान बनाने और उनका सम्मान बढ़ाने के प्रयास किए हैं।

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