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भारत सरकार बनी संकट मोचक

भारत से मीलों दूर दुनिया के अलग-अलग कोने में काम/अध्ययन कर रहे भारतीय नागरिकों के मन में यह विश्वास पक्का हो गया है कि जब भी वे मुसीबत में फसेंगे भारत सरकार उनको संकट मोचक बनकर बचा लेगी। अफ्रीकी देश सूडान में सेना और विशेष सुरक्षा बल की आपसी लड़ाई के कारण बनी गृहयुद्ध की स्थितियों ने वहाँ नागरिक समाज के सामने बड़ा संकट उत्पन्न कर दिया। लगातार बिगड़ती स्थितियों को देखकर अनेक देशों ने अपने दूतावास खाली कर दिए। ऐसी विषम परिस्थितियों में भारत सरकार ने एक बार फिर संकट मोचक का रूप धरकर सूडान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन कावेरी शुरू किया। हालात इतने जटिल थे कि पर्याप्त जमीनी तैयारी के बिना वहाँ से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू नहीं किया जा सकता था। इसलिए जहां विदेश मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा था कि भारत सरकार के ऐसे किसी ऑपरेशन को नुकसान न पहुंचाया जाए, वहीं सूडान में फंसे भारतीयों से संपर्क कर उनके हालात की जानकारी लेते हुए उन्हें उचित सलाह भी दी जा रही थी। भली प्रकार तालमेल बैठाने के बाद भारत सरकार ने वहाँ से अपने लोगों को निकालना शुरू कर दिया है। सूडान में फंसे कुल भारतीयों की संख्या लगभग 4000 बताई जा रही है। उम्मीद है कि सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित अपने देश लेकर आया जा सकेगा। ध्यान रहे, संकट के ऐसे मौकों पर भारतीयों को सुरक्षित निकालने का भारत सरकार का पुराना कीर्तिमान रहा है। पहले खाड़ी युद्ध (1990-91) के दौरान एयर इंडिया के विमानों के जरिए एक लाख साठ हजार लोग कुवैत से निकाले गए थे। हाल के वर्षों की बात करें तो यमन (2015), अफगानिस्तान (2021) और यूक्रेन (2022) के ऐसे अभियान भी खासे चर्चित रहे। बहरहाल, भारतीयों को सूडान से सुरक्षित निकालना समस्या का सिर्फ एक पहलू है। सूडान कई वजहों से हमारे लिए बहुत महत्व रखता है। वहां तेल क्षेत्र में भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक हित हैं। वह भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख प्रदाता भी है। ऐसे में अगर वहां जारी सत्ता संघर्ष जल्द काबू में नहीं आया तो यह देश लंबे समय की अस्थिरता में फंस सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। प्रत्यक्ष आर्थिक हितों के अलावा भी सूडान की यह हिंसा भारत के हितों को प्रभावित कर सकती है। सूडान की सीमा इजिप्ट, इथियोपिया, लीबिया आदि देशों से लगती है। ये देश पहले से ही आंतरिक संघर्षों में उलझे हैं। ऐसे में इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, जो किसी के पक्ष में नहीं होगी। आवश्यक है कि समय रहते इस संघर्ष को रोकने के प्रयास तेज किए जाएं। भारत को इस दिशा में भी पहलकदमी करनी होगी। भारत पहले से ही अफ्रीकी देशों में शांति स्थापना के लिए प्रयासरत है। इसलिए भारत के पास पुराना अनुभव भी है। अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ ही यदि भारत सूडान में शांति स्थापित कराने में सफल होता है, तब उसकी धाक और बढ़ जाएगी।

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