Home संपादकीय खरीदारी में स्वदेशी को दें प्राथमिकता

खरीदारी में स्वदेशी को दें प्राथमिकता

49
0
NEW DELHI, OCT 22 (UNI)- Prime Minister Narendra Modi addressing to the nation, in New Delhi on Friday. UNI PHOTO-4U

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन में 100 करोड़ लोगों को टीका लगाए जाने वाली बड़ी उपलब्धि का श्रेय देश की सामूहिक शक्ति को दिया। यह सत्य है कि विश्व के किसी भी देश की तुलना में कोरोना महामारी का सामना हम ज्यादा अच्छे तरीके से इसलिए कर सके क्योंकि हमने जन भागीदारी को अपनी ताकत बनाया
और सामूहिक शक्ति का जागरण किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन में 100 करोड़ लोगों को टीका लगाए जाने वाली बड़ी उपलब्धि का श्रेय देश की सामूहिक शक्ति को दिया। यह सत्य है कि विश्व के किसी भी देश की तुलना में कोरोना महामारी का सामना हम ज्यादा अच्छे तरीके से इसलिए कर सके क्योंकि हमने जन भागीदारी को अपनी ताकत बनाया और सामूहिक शक्ति का जागरण किया। नये भारत के निर्माण के लिए भी इसी सामूहिक शक्ति के जागरण की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष भारत को आर्थिक तौर पर शक्ति प्रदान करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया था। उसके परिणाम भी हमें दिखाई दिए। आज देश में विदेशी ब्रांड की जगह स्वदेशी की गूंज सुनाई देती है। हमारे देश में दीपावली से पहले बड़े स्तर पर खरीदारी शुरू हो जाती है। शारदीय नवरात्र के साथ ही त्योहारों और शुभ अवसरों की एक शृंखला प्रारंभ होती है, जो दीपावली के बाद तक जारी रहती है। इन शुभ प्रसंगों पर हम आवश्यक वस्तुएं, उपहार और चल-अचल संपत्ति क्रय करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ठीक ही कहा कि वर्षभर की खरीदारी एक तरफ और दीपावली की खरीदारी एक तरफ। इसलिए ‘स्वदेशी की भावना को जाग्रत करने का यह ठीक समय है। यह एक अवसर है जब हम ‘वोकल फॉर लोकल के शुभ संकल्प को सामूहिक शक्ति से सिद्ध कर सकते हैं। जो भी देश आज हमें विकसित दिखाई दे रहे हैं, वे सब स्वदेशी के आधार पर खड़े हैं। अगर हमें भी वैश्विक पटल पर अपने कदमों को अंगद की तरह मजबूती से जमाना है तब आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। ”

इस दीपावली हम सब भारत में बनी और भारत के लोगों द्वारा बनाई गई वस्तु खरीदें। हम ऐसी वस्तुएं खरीदें, जिन्हें बनाने में भारतीय नागरिकों का पसीना लगा हो। स्वदेशी (मेक इन इंडिया/वोकल फॉर लोकल) जनांदोलन बन जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी का यह सामान्य-सा आह्वान एक चमत्कार कर सकता है। यदि हम गंभीरता से इस दिशा में विचार करें। अपने त्यौहार पर अपने लोगों का सामान खरीदना कोई कठिन काम तो नहीं है न? इसलिए हम तय करें कि ब्रांडेड के चक्कर में न पड़ कर स्थानीय उत्पाद को प्रोत्साहित करेंगे। अपने स्थानीय उत्पाद को ब्रांड बनाएंगे।

स्थानीय उत्पाद को न केवल खरीदेंगे अपितु उपयोग के बाद संतुष्ट होने पर उसका प्रचार भी करेंगे। अपने परिचितों के साथ और अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से उस उत्पाद की खूबियां सबके साथ साझा करेंगे। हम ऐसा विज्ञापन करेंगे कि उन देशी-विदेशी बड़े ब्रांडों को शर्म आ जाए, जो प्रचार में भी हिन्दू समाज पर आघात करते हैं। यह लगातार देखने में आ रहा है कि विभिन्न देशी-विदेशी कंपनियां अपने उत्पाद का प्रचार करने के लिए ऐसी झूठी कहानियां प्रस्तुत कर रही हैं, जिनसे हिन्दू समाज की छवि यथार्थ के ठीक विपरीत संकीर्ण, कूपमंढूक और असहिष्णु समाज के रूप में बन रही है।

‘स्वदेशी की भावना को जाग्रत करके और उसे बढ़ावा देकर, ऐसे औपनिवेशिक दासता में डूबे दिमागों को भी ठीक करना है। विश्वास है कि भारतीयता से ओत-प्रोत सज्जनशक्ति यहाँ भी अपनी सामूहिक शक्ति का दर्शन सबको देगी।

Previous articleमानवाधिकारों से वंचित बांग्लादेश के हिन्दू
Next articleकितूर की वीररानी रानी चेन्नम्मा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here