जी-20 की अध्यक्षता, कमल का फूल और कांग्रेस

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल स्वयं को सशक्त एवं ताकतवर बना रहा है अपितु दृढ़ता एवं साफ-सुथरी शासन-व्यवस्था से दुनिया को भी प्रभावित कर रहा है। विश्व के बड़े देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन भारत की भूमिका को गंभीरता से ले रहे हैं। विश्वपटल पर भारत की इस छवि को देखकर प्रत्येक भारत को गौरव की अनुभूति होती है। दुनिया के 20 प्रमुख देशों के संगठन जी-20 की अध्यक्षता का अवसर भारत को मिलने से एक बार फिर भारतवासी गौरवान्वित हैं। ध्यान रहे कि यह संगठन दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय मंच है। इस समूह के सभी देश मिलकर विश्व की 75 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंच पर अध्यक्ष के रूप में भारत का उपस्थित रहना बहुत मायने रखता है। भारत के संबंध में दुनिया की धारणा है कि यह देश वसुधैव कुटुम्बकम् की बात करता है। सह-अस्तित्व एवं शांति की सिद्धांतों को आगे बढ़ता है। इसलिए भारत जब भी नेतृत्व की भूमिका में रहता है, तब वह दुनिया को सही दिशा में आगे लेकर चलने का प्रयास करता है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की अध्यक्षता के शुभंकर, संदेश और वेबसाइट को लोकार्पित किया तब उन्होंने भारतीय संस्कृति के इसी संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का नारा भारत के संस्कारों एवं संस्कृति से विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। नये प्रतीक चिन्ह के कमल के पुष्प पर विराजित पृथ्वी एवं कमल की सात पंखुड़ियों के माध्यम से सातों महाद्वीपों की एकजुटता और सौहार्द से समृद्धि एवं प्रगति का संदेश मिलता है”। नि:संदेह, समूची दुनिया को सुखी होने का मार्ग दिखाते हुए भारत स्वयं भी उस मार्ग पर अग्रसर होगा, इसके लिये मोदी का नेतृत्व निश्चित ही नवीन दिशाओं को उद्घाटित करेगा। गौरव की अनुभूति करानेवाले इस अवसर पर कांग्रेस ने उस कंकड़ का काम किया, जो स्वादिष्ट भोजन में दांतों के बीच आकर सारे आनंद को किरकिरा कर देता है। कांग्रेस के अंधविरोध और संकीर्ण मानसिकता को देखकर हैरानी होती है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 के जिस शुभंकर को लोकार्पित किया है, उसमें शामिल ‘कमल का फूल’ उसे भारतीय जनता पार्टी का ‘चुनाव चिह्न’ नजर आया, देश की संस्कृति का प्रतीक और भारत का राष्ट्रीय पुष्प नहीं। जो पुष्प भारत की संस्कृति का प्रतिनिधि होने के कारण राष्ट्रीय पुष्प का दर्जा प्राप्त है, जो हिन्दू आस्था से जुड़ा है, जो स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष का प्रतीक रहा हो, उसके प्रति संकीर्ण दृष्टिकोण रखने को अंधविरोध और दिवालियेपन की पराकाष्ठा ही कहा जाएगा। न जाने क्यों कांग्रेस को यह लगा कि भाजपा जी-20 के शुभंकर (लोगो) में अपना चुनाव चिह्न डालकर खुद का प्रचार कर रही है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि जी-20 भारत के लिए चुनाव का मैदान नहीं है, वह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, वैश्विक पटल पर अपनी छाप छोड़ने का। दरअसल, कांग्रेस ने जो किया है, बाकी निर्णयों में उसे वैसा ही नजर आता है। कांग्रेस के नजरिए से तो यह प्रश्न जायज है कि उसने राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय ध्वज से मिलता-जुलता झंडा अपने लिए चुना। राष्ट्र ध्वज के निर्माण की कहानी सबको ज्ञात ही है कि ध्वज समिति ने सर्वसम्मति से भगवा रंग के झंडे को भारत का राष्ट्र ध्वज बनाने का सुझाव दिया थ। बहरहाल, कोई कुछ भी कहे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता का लाभ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मिल रहा है। जी-20 की अध्यक्षता भारत को आगे लेकर जाएगी।

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