Home संपादकीय किसानों का हित

किसानों का हित

14
0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नये मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में किसानों के हित में कृषि अवसंरचना फंड को आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत बढ़ाकर लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस फंड का उपयोग कृषि उत्पाद विपणन समितियां करेंगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एक बार फिर यह कहा है कि मंडियां समाप्त नहीं होंगी।

केन्द्र सरकार ने एक बार फिर किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने तथाकथित आंदोलन को समाप्त कर दें। सरकार किसानों की बेहतरी के लिए संकल्पित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नये मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में किसानों के हित में कृषि अवसंरचना फंड को आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत बढ़ाकर लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस फंड का उपयोग कृषि उत्पाद विपणन समितियां करेंगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एक बार फिर यह कहा है कि मंडियां समाप्त नहीं होंगी।

सरकार उपज मंडियों को सशक्त करेगी और उन्हें पहले से अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। याद हो कि किसानों के बीच में यह भ्रम पैदा किया गया है कि नये कानूनों के अंतर्गत कृषि उपज मंडियों को समाप्त करने का प्रावधान है। जबकि सच यह नहीं है। वास्तविकता यह है कि मंडिया पहले की तरह संचालित होती रहेंगी। नये कृषि कानून तो किसानों को अपनी फसल उचित मूल्य पर बेचने के लिए नये अवसर दिला रहे हैं। विपक्षी राजनीतिक दल और उनके समर्थक वर्ग ने साजिश के तहत नये कृषि कानूनों को लेकर अनेक भ्रम पैदा करने के प्रयास किए थे।

भ्रम के सभी गुब्बारे एक-एक करके फूट चुके हैं। इसलिए तथाकथित किसान नेताओं ने अब एक ही टेक लगा रखी है कि नये कृषि कानूनों को वापस लो। ये लोग यह बताने में अक्षम हैं कि नये कानूनों में आपत्तिजनक क्या है? पिछले कुछ समय से यह स्पष्ट हो चुका है कि यह किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीति है। स्वार्थ और संकीर्णता से भरी राजनीति के कारण किसानों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। तथाकथित आंदोलनकारियों का हिंसक और अनैतिक आचरण भी सामने आ चुका है। आंदोलनजीवियों को यह समझना होगा कि अपने कथित किसान आंदोलन के माध्यम से किसानों का ही नुकसान कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक शोध के अनुसार, पुराने कृषि कानूनों के कारण किसानों का बहुत नुकसान हो रहा है।

किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। पुराने कानूनों के मकडज़ाल के कारण किसानों में आत्महत्या की दर भी बढ़ी है। जबकि नये कानून किसानों को सशक्त कर रहे हैं। यह कानून किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनानेवाले हैं। किसानों के हित में मोदी सरकार ने सदैव सकारात्मक कदम उठाए हैं, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। इसी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार किसानों को नकद सहायता (किसान सम्मान निधि) देना प्रारंभ किया है। इसके अलावा अन्य योजनाएं भी हैं, जिन्होंने किसानों के हाथों को मजबूत किया है। कोरोनाकाल में संकट को देखते हुए आगामी १० वर्ष के लिए प्रारंभ किए गए कृषि अवसंरचना फंड को विस्तार देने के पीछे भी सरकार की किसान हितैषी छवि को मजबूत बनाती है।

Previous articleगर्भवती महिलाएं भी बेझिझक लगवाएं कोविड का टीका
Next articleभावनाएं कहीं नहीं जाएंगी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here