उत्साहवद्र्धक कर संग्रहण

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कोरोना महामारी के कारण मंद हुई आर्थिक गतिविधियों में पहले जैसी तेजी आने लगी है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में आई बढ़ोतरी इस बात के संकेत देती है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले माह में जीएसटी संग्रहण 1.68 लाख करोड़ रुपये हुआ, जो जुलाई, 2017 में इस कराधान प्रणाली के लागू होने के बाद से सर्वाधिक मासिक संग्रहण है। यह आंकड़ा अप्रैल, 2021 की तुलना में 20 प्रतिशत तथा इस वर्ष मार्च से लगभग 18 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष के हिसाब से देखें, तो बीते अप्रैल में आयातित वस्तुओं से 30 प्रतिशत तथा घरेलू लेन-देन (इसमें आयातित सेवाएं भी शामिल हैं) से 17 प्रतिशत अधिक राजस्व हासिल हुआ है। यह कराधान मार्च की बिक्री के आधार पर हुआ है। इसका एक अर्थ तो यह है कि मुद्रास्फीति के कारण मांग में कमी के बावजूद कारोबारी गतिविधियां बढ़ रही हैं। इससे दूसरा संकेत यह मिलता है कि कारोबारियों में कर देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि उचित कर संग्रहण के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं, जैसे- लोगों को समय से कर देने के लिए प्रोत्साहित करना, कराधान प्रणाली को सरल एवं प्रभावी बनाना तथा समुचित कर न चुकानेवालों के विरुद्ध कार्रवाई करना। इन प्रयासों में डाटा विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल बड़ा कारगर साबित हुआ है। इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए भरोसा जताया है कि सबकी साझा कोशिशों से देश की अर्थव्यवस्था लगातार बेहतरी की ओर बढ़ रही है। देश का आर्थिक स्वास्थ्य ठीक रखना जहाँ सरकार की जिम्मेदारी है, वहीं व्यापारिक जगत का भी दायित्व है कि वह ईमानदारी से कर का भुगतान करे। अच्छी बात है कि पिछले कुछ वर्षों में करदाताओं की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसका अभिप्राय है कि नये भारत के निर्माण का सपना केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नहीं रह गया है, यह सपना जन-जन का है। ईमानदारी से चुकाया गया कर ही देश में चल रही विकास योजनाओं एवं लोक कल्याणकारी योजनाओं को प्राणवायु देता है। राजस्व बढ़ता है तब सरकार का उत्साह भी बढ़ता है। बहरहाल, यदि जीएसटी में लगातार बढ़ोतरी को बीते वित्त वर्ष के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के संग्रहण के आंकड़ों के साथ रखकर देखें, तो एक उत्साहवद्र्धक तस्वीर उभरती है। वित्त वर्ष 2021-22 में प्रत्यक्ष करों में 49 और अप्रत्यक्ष करों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी तथा कुल कर संग्रहण 27.07 लाख करोड़ रुपये का हुआ था। यह न केवल बजट अनुमानों से अधिक था, बल्कि 2020-21 की राजस्व प्राप्ति से 34 प्रतिशत अधिक था। स्पष्ट है कि घरेलू और वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति के पथ पर है।

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