शीर्ष की ओर आर्थिक विकास दर

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देश के लिए उत्साहवर्धक समाचार है कि हमारी आर्थिक विकास दर शीर्ष की ओर अग्रसर है। यह उत्साह तब ओर बढ़ जाता है जब यह आंकड़ा भी सामने आता है कि भारत की जीडीपी विश्व में सबसे अधिक तेज गति से बढ़ रही है। कोरोना पूर्व जब स्थितियां सामान्य थीं, उस समय की जीडीपी को भी हमने लांघ लिया है। आज भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.4 प्रतिशत पहुँच गई है। 2019 में अर्थव्यवस्था का आकार 35.61 लाख करोड़ था, वहीं अब यह 35.71 लाख करोड़ हो गया है। यह आर्थिक संकेत इस बात के साक्षी हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुकी है। एक ओर यह शुभ समाचार है तो वहीं तीसरी लहर की आशंका मन में भय पैदा कर रही है। 24 प्रतिशत का गोता लगाकर उबरी हमारी अर्थव्यवस्था को तीसरी लहर एक बार फिर झटका दे सकती है, इस बात की आशंका है।

यह आशंका निरर्थक हो सकती है यदि शासन-प्रशासन के साथ नागरिक समाज भी सजग हो जाए। कोरोना संक्रमण की दूसरी आवृत्ति से यह अनुभव सबको भली प्रकार हो चुका है कि संक्रमण हम सबकी लापरवाही से अधिक फैलता है। यदि हम सब कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों का कठोरता और गंभीरता के साथ पालन करें, तब तीसरी लहर को आने से रोका जा सकता है। इस संबंध में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले बढ़ते देखकर जिस प्रकार की सक्रियता दिखाई है, वह अन्यों के लिए अनुकरणीय हो सकती है। आम लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने सड़कों पर निकलने की योजना भी बनाई है।

इसी तरह राज्यों को देखें, तो जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है लेकिन कांग्रेस सरकारें इस मामले में सुस्त दिखाई दे रही हैं। कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में टीकाकरण एक बड़ा और प्रमुख उपाय है। अन्य देशों के मुकाबले दूसरी लहर के बाद संक्रमण के नये मामलों पर हम नियंत्रण कर पाए तो उसका सबसे बड़ा कारण तेजी से चला टीकाकरण अभियान ही है। इसलिए कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों को भी अपने राज्यों में जागरूकता लाने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। ये सब उपाय न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए आवश्यक हैं, बल्कि नागरिकों और देश के आर्थिक स्वास्थ्य की भी सुरक्षा इनसे है।

कोरोना महामारी के कारण विश्व के सामथ्र्य सम्पन्न देशों की अर्थव्यवस्था से लेकर भारत की भी अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक मंदी आई तो उसका नुकसान देश के साथ उसके नागरिकों को भी हुआ। रोजगार, स्वरोजगार, व्यवसाय सब पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अब जबकि अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व वृद्धि से सबकी खुशहाली के संकेत मिल रहे हैं, तब बहरूपिये वायरस के कारण संभावित संक्रमण की तीसरी आवृत्ति को रोकने के लिए हम सबको सजग होना ही होगा। भारत की क्षमता, भारत की मेधा, भारत के श्रम, भारत की नीतियों एवं नेतृत्व पर समूचे विश्व का विश्वास बना हुआ है, तब उस विश्वास को हमें और अधिक मजबूत बनाने के प्रयास करने ही चाहिए।

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